पिथौरागढ़। फायर सीजन के मद्देनजर वन विभाग 15 फरवरी से 15 जून तक सावधानी बढ़ाता है लेकिन इस बार वन पंचायत और सिविल वनों को आग से बचाने की चुनौती होगी। वन विभाग ने फायर सीजन में आग की घटनाओं से निपटने के लिए अभी से तैयारियां शुरू कर दी हैं। वन विभाग ने जिले में 77 क्रू स्टेशनों को सक्रिय कर दिया है। इसके साथ ही 1460 किमी लंबी फायर लाइन की सफाई की जा रही है। पंचायती वनों की सुरक्षा के लिए ग्राम पंचायतों का सहयोग लिया जाएगा।
सीमांत जिले में वन पंचायतों के अधीन 2.77 लाख हेक्टेयर वन क्षेत्र है जबकि 41700 हेक्टेयर सिविल वन राजस्व विभाग के पास है। 75983 हेक्टेयर आरक्षित वन क्षेत्र वन विभाग के पास है। 1192.25 हेक्टेयर निजी वन और 1.44 लाख हेक्टेयर अवर्गीकृत वन क्षेत्र है। फायर सीजन में वन पंचायत, सिविल वन, निजी वन और अवर्गीकृत वन क्षेत्रों में आग की घटनाएं होती हैं। कई बार अनियंत्रित आग आबादी और आरक्षित वन क्षेत्र तक पहुंच जाती है। जिले की 1621 वन पंचायतों में सरपंचों का चुनाव हो गया है। फायर सीजन में उनकी जिम्मेदारी भी बढ़ गई है। वन विभाग ने अब जिला प्रशासन से भी जिले के हर क्षेत्र में होने वाली आग की घटनाओं की सूचना समय पर देने की मांग की है।
2019 में हुई आग की सर्वाधिक घटनाएं
पिथौरागढ़। जंगलों में आग की घटनाएं बढ़ने से वन संपदा को काफी नुकसान पहुंच रहा है। पिछले तीन सालों में आग की सर्वाधिक 135 घटनाएं वर्ष 2019 में हुईं। तब 293 हेक्टेयर वन क्षेत्र जला। इसके सापेक्ष वर्ष 2018 में जिले में आग की 95 घटनाओं में 197 हेक्टेयर वन क्षेत्र प्रभावित हुआ जबकि 2020 के कोरोना काल में दर्ज 26 घटनाओं में 28 हेक्टेयर जंगल जले।
फायर सीजन में सिविल और आरक्षित वन क्षेत्रों से आग की घटनाओं की जानकारी समय से नहीं मिल पाती है। इस कारण आग पर काबू पाने में दिक्कत होती है। लोगों को वनों का महत्व समझना होगा। अगर कोई व्यक्ति वनों में आग लगाते पकड़ा गया गया तो उसके खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाएगी।
- डॉ. विनय भार्गव, डीएफओ पिथौरागढ़।