अस्कोट/पिथौरागढ़। जंगल की आग से अस्कोट के मल्लिकार्जुन महादेव मंदिर प्रांगण में लगाए पौधे जल गए हैं। पांच साल लोगों ने मेहनत कर पौधों की देखरेख की लेकिन पांच घंटे में पांच साल की मेहनत बर्बाद हो गई।
मल्लिकार्जुन महादेव सेवा समिति के अध्यक्ष तेज बहादुर पाल ने शनिवार रात दस बजे बाद मंदिर से घर लौटे। सुबह पांच बजे मंदिर क्षेत्र में धुआं उठता दिखाई दिया। इसके बाद आनन-फानन क्षेत्र में पहुंचे।
जहां पर जंगलों में लगी ने मंदिर प्रांगण में पांच साल पूर्व आंवला, बेलपत्र, देवदार, बांज समेत फूलों के लगाए गए 500 पौध जल गए। उन्होंने कहा कि रात के समय अज्ञात व्यक्ति ने क्षेत्र में पहुंचकर आग लगाई है।
इससे पांच साल की मेहनत घंटों में खत्म हो गई। लोगों ने बड़ी मेहनत से निराई-गुड़ाई कर पौधों की देखरेख की थी। असामाजिक तत्वों की करतूत से पर्यावरण को भारी नुकसान पहुंचा है।
समिति के पंडित नारायण दत्त पंत, कल्याण चंद, तनुज पाल, गोविंद पाल, डमर सिंह लुंठी ने वन विभाग से जंगल क्षेत्रों में चौकसी करने की मांग की है।
टीआरसी के पास के जंगल में लगी आग
पिथौरागढ़। टीआरसी के पास रविवार को चीड़ के जंगल में आग लग गई। सूचना मिलने पर अग्निशमन अधिकारी नरेंद्र प्रसाद के नेतृत्व में फायर ब्रिगेड मौके पर रवाना हुई।
फायर कर्मियों ने पानी की बौछारें डालकर पिरूल और पेड़ों में सुलग रही आग पर काबू पाया। आग बुझाने वालों में आन सिंह परिहार, पुष्कर सिंह, छत्तर सिंह, भूपाल राम, विनोद सिंह मेहरा, सुजीत काला शामिल रहे।
इस दौरान हरेला सोसायटी के सदस्यों ने भी चीड़ के जंगल में फैली आग बुझाने में मदद की। समिति के सदस्यों ने पुनेड़ी वन पंचायत में पिरूल और खरपतवार हटाकर फायर लाइन साफ की। इस दौरान सदस्यों ने चीड़ के पिरूल के उपयोग पर भी चर्चा की गई।