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Pithoragarh News: बुजुर्ग महिला को कंधों पर लाद कर तय की तीन किमी दूर अस्पताल की डगर

Sun, 30 Aug 2026 10:35 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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अस्कोट (पिथौरागढ़)। सीमांत जिले के ग्रामीण क्षेत्रों में आज भी सड़क जैसी बुनियादी सुविधा का अभाव लोगों के लिए नासूर बना हुआ है। पिथौरागढ़ के अस्कोट क्षेत्र के तहत आने वाली ग्राम पंचायत देवल के दयाकोट, गैराड़ और ब्यालछीना तोक सड़क मार्ग से करीब तीन किलोमीटर नीचे बसे हैं। सड़क न होने के कारण यहां के ग्रामीणों को मामूली स्वास्थ्य समस्याओं के लिए भी भारी संघर्ष करना पड़ता है।
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बीते शनिवार रात देवल गांव की 70 वर्षीय पार्वती देवी की अचानक तबीयत बिगड़ गई। रात के वक्त खड़ी चढ़ाई और खराब रास्तों के कारण परिजनों के समक्ष बड़ी चुनौती खड़ी हो गई कि बुजुर्ग महिला को मुख्य बाजार तक कैसे पहुंचाया जाए। परिवार ने किसी तरह चिंता के साए में रात काटी और तड़के ग्रामीणों ने मिलकर लकड़ी के डंडों और चादर के सहारे एक अस्थायी स्ट्रेचर तैयार किया।

बरसात के कारण क्षतिग्रस्त और फिसलन भरे रास्तों पर करीब तीन किलोमीटर की खड़ी चढ़ाई पार करते हुए ग्रामीणों ने महिला को प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र पहुंचाया, जहां उनका उपचार शुरू हुआ।
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स्थानीय निवासी आनंद खत्री, जगदीश, लाल सिंह और हरीश खत्री ने रोष जताते हुए कहा कि सरकारें भले ही हर गांव तक सड़क पहुंचाने के दावे करती हैं लेकिन जमीनी हकीकत आज भी बदहाल है। बार-बार गुहार लगाने के बावजूद प्रशासन और जनप्रतिनिधियों की उदासीनता के कारण ग्रामीण बुनियादी सुविधाओं से महरूम हैं।
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सड़क ऐसी जिस पर नहीं चलती गाड़ियां
देवल के ग्राम प्रधान प्रधान टिकेंद्र बहादुर पाल ने बताया कि देवल गांव के तोकों को सड़क मार्ग से जोड़ने के लिए 2019 में विधायक निधि से सड़क काटी गई। सड़क काट दी गई लेकिन वाहनों के चलने लायक नहीं है। आधी-अधूरी बनी सड़क जगह-जगह क्षतिग्रस्त है। सड़क पर दुपहिया वाहन भी नहीं गुजरता है। स्थानीय विधायक से सड़क सुधारीकरण के आश्वसन के सिवाय ग्रामीणों को कुछ नहीं मिला। बरसात में पैदल मार्ग भी कई जगह ध्वस्त होने से ग्रामीणों के मुश्किलें बढ़ गई हैं।
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बोले लोग-
बीमार को डोली में लादकर तीन-चार किलोमीटर दूर अस्पताल पहुंचाना आम बात हो गई है। गांव में किसी के भी बीमार होने पर लोगों के हाथ-पांव फूल जाते हैं। आपात स्थिति में अपने सारे कामकाज छोड़कर बीमार को अस्पताल पहुंचाने में दिन बीत जाता है।
विनोद खत्री, देवल

गांव में 65 से 70 परिवार हैं। सुविधाओं के अभाव में कुछ परिवार पलायन कर गए हैं। गांव में अस्पताल, सड़क सुविधा नहीं है। प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र गांव से तीन किलोमीटर दूर है। गंभीर रूप से बीमार को अस्पताल पहुंचाने मेें लोगों के पसीने छूट जाते हैं।
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फकीर खत्री, देवल
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