राजकीय प्राथमिक स्कूल चौसाल के भवन की छत पांच साल पहले टूट गई थी। अभी तक न तो नया भवन स्वीकृत हुआ है और न ही टूटे भवन की मरम्मत ही की गई है। खतरे को देखते हुए मुख्य भवन के कमरों में बच्चों को नहीं बैठाया जाता। विद्यालय के शिक्षक और अभिभावक इस समस्या को लेकर खासे चिंतित हैं। शिक्षा विभाग के अधिकारियों ने ऐसे क्षतिग्रस्त भवनों की मरम्मत के प्रस्ताव बनाकर शासन को भेज दिए थे लेकिन अब तक इस मद में धनराशि नहीं आई है।
दुर्गम क्षेत्र के चौसाल में 1960 में प्राथमिक स्कूल खोला गया। उसी समय स्कूल भवन का निर्माण कराया गया। तब से 2011 तक इस भवन में सभी कक्षाओं का संचालन होता रहा। 2012 में स्कूल के मुख्य भवन की छत का एक भाग टूट गया। पांच साल बीतने के बाद भी अब तक न तो इस जर्जर भवन के बदले नए भवन की स्वीकृति मिली और न ही इस टूटे भवन को सही करने की कोशिश विभाग के द्वारा की गई। अब स्कूल में पढ़ने वाले 14 बच्चे बरामदों में बैठकर पढ़ाई करते हैं। इस स्कूल से थोड़ी दूरी पर वर्ष 2012 में स्कूल की जमीन पर ब्लॉक कनालीछीना की मद से एक भवन का निर्माण कराया गया परंतु अब तक यह भवन किसी शिक्षण संस्थान को हस्तांतरित नहीं हुआ है। प्रधानाचार्या कमला ऐरी ने बताया कि यह भवन क्यों बनाया गया इसकी जानकारी देने वाला कोई नहीं है। जबकि चौसाल स्कूल इस नए भवन से करीब एक किलोमीटर की दूरी पर है। अब बारिश का मौसम नजदीक आ रहा है और चौसाल स्कूल के बच्चों को इसी खतरनाक भवन में जाकर पढ़ाई करनी होगी। विद्यालय प्रबंधन समिति के अध्यक्ष हिम्मत सिंह ऐरी ने बताया कि पांच साल से शिक्षा विभाग को भवन की मरम्मत करने और नया भवन बनाने के लिए पत्र भेजा जा रहा है लेकिन कोई ध्यान नहीं दिया गया। डीईओ शौकत अली का कहना है कि जर्जर स्कूल भवनों की पूरी सूची शासन को भेजी गई है। अभी इस मद में धनराशि मंजूर नहीं हो पाई है।