30 जून 2016 को बस्तड़ी में आई आपदा के बाद राहत और बचाव के नए तरीकों का प्रयोग करने के लिए बाल वैज्ञानिक रितिक टम्टा के मॉडल को राष्ट्रीय स्तर पर सराहना मिली है। राष्ट्रीय शैक्षिक अनुसंधान परिषद की ओर से 10 से 16 नवंबर तक भोपाल में आयोजित राष्ट्रीय विज्ञान प्रदर्शनी में प्रस्तुत उनके मॉडल की तारीफ हुई। जिले से इस प्रदर्शनी में भाग लेने वाले वह एकमात्र बाल वैज्ञानिक हैं।
राजकीय हाइस्कूल न्वाली (कनालीछीना) में अध्ययन के दौरान पिछले वर्ष आपदा प्रबंधन पर तैयार उनके मॉडल को राज्य स्तर पर पहला पुरस्कार मिला और राष्ट्रीय स्तर के लिए चयन हुआ। इस समय राइंका छड़नदेव में कक्षा 11 पढ़ रहे रितिक ने अपने मॉडल को ग्लूकोज चढ़ाने वाली पाइप और इंजेक्शन की मदद से तैयार किया।
वह कहते हैं कि आपदा प्रभावित क्षेत्रों में हाइड्रोलिक पुल बनाने चाहिए। ऐसे पुल पानी में बहने के बजाय जमीन से ऊपर उठ जाते हैं। इसके साथ-साथ हाइड्रोलिक ट्रॉली लगा दी जाए तो उससे भी आवागमन हो सकता है। आपदा के समय बिजली की सप्लाई बाधित हो जाती है। ऐसे में बिजली से चलने वाली ट्राली काम नहीं करती। उन्होंने कहा कि राज्य और राष्ट्रीय स्तर पर उनके इस विचार को स्वीकार किया गया। वह कहते हैं कि आपदा प्रभावित इलाकों में सीमेंट या लोहे के पुल बनाने के बजाय अल्युमीनियम के हल्के वजन वाले पुल बनाए जाने चाहिए। यह पुल ज्यादा मजबूत होते हैं और बहने का खतरा भी नहीं रहता। रितिक के मार्गदर्शक शिक्षक महिमन सिंह खड़ायत भी भोपाल गए। यह मॉडल रितिक ने उनके ही निर्देशन में तैयार किया।
जिला विज्ञान समन्वयक डॉ. विकास पंत ने बताया कि रितिक ने जिले का नाम रोशन किया है और उम्मीद है कि सरकार आपदा पर उसके इस मॉडल को आधार मानकर भविष्य में कोई योजना तैयार करेगी। रितिक एक साधारण परिवार से है। उसके पिता सुशील कुमार टम्टा छोटा-मोटा काम करते हैं।