बंगापानी (पिथौरागढ़)। प्रकृति की मार और सिस्टम की बेपरवाही के बीच लोदी और टांगा के ग्रामीण जोखिम में जिंदगी जीने को मजबूर हैं। प्रशासन ने फाइलों में गांवों तक सड़कें तो पहुंचा दीं लेकिन जमीनी हकीकत इससे अलग है। दोनों गांवों की दो हजार से अधिक आबादी प्रशासन की अनदेखी का शिकार है।
अधूरे काम की वजह से बदहाल हालात में ये सड़कें किसी काम की नहीं रहीं। वाहनों की आवाजाही ठप है और ग्रामीण शेरघटिया नदी के ऊपर गरारी के सहारे जान हथेली पर रखकर सफर कर रहे हैं। संचार सेवाओं के अभाव ने उनकी मुश्किलें और बढ़ा दी हैं।
टांगा गांव को जोड़ने वाली सड़क पर आज तक पुल नहीं बन पाया। नतीजा यह कि शेरघटिया नदी का जलस्तर घटने पर ही वाहन आर-पार हो पाते हैं। खतरे को देखते हुए चालक नदी में वाहन उतारने से कतराते हैं। ऐसे में ग्रामीणों के पास गरारी से आना-जाना ही एकमात्र विकल्प बचता है। दूसरी ओर लोदी के लिए बनी कच्ची सड़क भी बदहाली का शिकार है, जिस पर चलना किसी चुनौती से कम नहीं। लोग वर्षों से पुल निर्माण और सड़क सुधारीकरण की मांग कर रहे हैं लेकिन सुनवाई अब तक नहीं हुई।
अपनों से बात करने को 15 किमी की दौड़
मोबाइल नेटवर्क के अभाव में टांगा और लोदी के ग्रामीण अपनों की खैर-खबर लेने के लिए 15 किलोमीटर दूर मदकोट जाने को मजबूर हैं। बिंदी, भिकुड़ी, मुनीयालपानी, धरकुड़ा, मोती घाट, दानी बगड़, फरवेकोट जैसे तोकों के लोग वर्षों से बीएसएनएल टावर की मांग कर रहे हैं। आपात स्थिति में एंबुलेंस बुलानी हो तो भी पहले मदकोट पहुंचना पड़ता है। बीमारों और गर्भवतियों के लिए इतनी दूरी में जान पर बन आती है।
पूरा गांव भूस्खलन की जद में, फिर भी विस्थापन नहीं
टांगा आपदा प्रभावित गांव है। लगातार पहाड़ी दरकने और भूस्खलन से पूरा गांव खतरे की जद में है। प्रशासन भी मान चुका है कि सुरक्षा के लिए विस्थापन जरूरी है, लेकिन घोषणा के बाद अमल नहीं हुआ। गांव के नीचे सरकती पहाड़ी और बार-बार होता भूस्खलन आने वाली अनहोनी की चेतावनी दे रहा है।
कोट
टांगा और लोदी के लिए बनी सड़कों का सुधारीकरण नहीं हो रहा है। टांगा के आपदा प्रभावितों के विस्थापन की घोषणा हवाई साबित हुई है। यदि सड़कों का सुधारीकरण, पुल का निर्माण और प्रभावितों का विस्थापन नहीं हुआ तो आंदोलन होगा। - भावना दानू, जिला पंचायत सदस्य, मदकोट
कोट
आपदा प्रभावित क्षेत्रों की भूगर्भीय जांच के लिए जल्द टीम पहुंचेगी। क्षेत्र की सड़कों के सुधारीकरण के भी प्रयास होंगे। प्रभावितों की समस्याओं के समाधान के लिए गंभीरता से काम किया जाएगा। - डॉ. ललित मोहन तिवारी, एसडीएम, मुनस्यारी