पिथौरागढ़। प्रस्तावित पंचेश्वर बांध को लेकर लोग अब अलग तरीके से सोचने लगे हैं। पंचेश्वर बांध की विस्तृत परियोजना रिपोर्ट (डीपीआर) के सामने आने के बाद जिस तरह लोगों में आशंकाओं के बादल घिर रहे हैं, उसे लेकर जल्दी ही फिल्म बनेगी। फिल्म विकास परिषद के सदस्य मनोज पांगती ने बताया कि पंचेश्वर बांध पर बनने वाली इस फिल्म को दूरदर्शन पर प्रसारित किया जाएगा। फिल्म में डूब क्षेत्र के लोगों की पीड़ा, उससे पर्यावरण पर पड़ने वाले प्रभाव, बांध बनने के बाद महाकाली घाटी की तस्वीर कैसी होगी आदि विषयों को फिल्म में समेटा जाएगा।
पांगती ने कहा कि पंचेश्वर बांध का निर्माण का फैसला इस सदी की सबसे बड़ी हलचलों में से एक है। इससे पहले पंचेश्वर बांध संघर्ष समिति की बैठक में कहा गया कि बांध बनने से ऊर्जा संबंधी जरूरतें तो पूरी होंगी लेकिन प्रभावित इलाके के लोगों को तमाम तरह के नुकसान झेलने होंगे। समिति का मानना है कि बांध बनने पर लोगों की जमीन डूब जाएगी, उनको अपने इलाके को छोड़कर जाना पड़ेगा, मकान, पेड़ों, जानवरों का मुआवजा कैसे दिया जाएगा, यह बड़े सवाल हैं।
विस्थापित होने वाले गांव के लोगों को एक ही स्थान पर बसाने की सरकार ने कोई योजना नहीं बनाई है। जो इलाके बांध के डूब क्षेत्र में नहीं आ रहे हैं, वहां भूकटाव, अतिवृष्टि, नमी का स्तर बढ़ने जैसी शिकायतें होने लगेंगी। कहा गया कि सरकार सिर्फ बांध से होने वाले लाभ वाले पक्ष पर ही ध्यान दे रही है। इससे होने वाले नुकसान का सही तरीके से अध्ययन ही नहीं हुआ है। बैठक में संघर्ष समिति के संयोजक बसंत भट्ट, उपाध्यक्ष भगवान सिंह भाट, कैप्टन गणेश सिंह, कुसुम मेहता, हयात राम, दीवान सिंह, कैलाश पलियाल आदि थे।