स्वाधीनता सेनानी की वीरांगना मोहनी देवी
- फोटो : अमर उजाला
विकासखंड कनालीछीना के पातलीगांव निवासी स्वाधीनता सेनानी स्व. मान सिंह की वीरांगना मोहनी देवी को वर्ष 2010 से पेंशन नहीं मिली है। परिजनों ने पेंशन के लिए अब तक काफी पत्र व्यवहार कर दिया, लेकिन कोई सफलता नहीं मिली है। 102 वर्षीय वीरांगना मोहनी देवी सात फरवरी 2017 को घर के आंगन में गिरकर घायल हो गई थीं, तब से वह बिस्तर पर ही हैं। वीरांगना के पोते महेंद्र सिंह ने रविवार को यह मामला स्वाधीनता सेनानी उत्तराधिकारी संगठन के सामने रखा है।
संगठन के पूर्व सचिव राजेश मोहन उप्रेती ने वीरांगना को पेंशन न मिलने के मामले में प्रधानमंत्री, केंद्रीय गृह मंत्री, प्रदेश के मुख्यमंत्री, जिलाधिकारी और स्टेट बैंक के प्रबंधक को पत्र लिखकर कहा है कि किन कारणों से यह पेंशन बंद हुई है उसकी जानकारी दी जाए, जबकि अक्तूबर 2010 तक वीरांगना को नियमित पेंशन मिलती थी। पत्र में उन्होंने लिखा है कि एक वीर स्वाधीनता सेनानी की बुजुर्ग वीरांगना को पेंशन का भुगतान न करना देशभक्तों का अपमान है। वीरांगना के पोते महेंद्र सिंह ने बताया कि वह पेंशन के मामले में सभी संबंधित अधिकारियों से पत्र व्यवहार कर चुके हैं।
इसके अलावा सूचना का अधिकार अधिनियम के तहत भी जानकारी मांगी गई, लेकिन कोई स्पष्ट जवाब नहीं मिला। स्थानीय स्तर पर अधिकारियों को पेंशन बंद होने के संबंध में कोई जानकारी नहीं है। जिलाधिकारी सी रविशंकर ने पिछले दिनों इस मामले में केंद्रीय स्वाधीनता सेनानी पेंशन प्रकोष्ठ नई दिल्ली को पत्र भेजकर पेंशन भेजने का आग्रह किया था।