स्वतंत्रता संग्राम सेनानी आश्रित खड़क जंग सिंह पाल
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स्वतंत्रता संग्राम सेनानी स्व. नरेंद्र सिंह पाल निवासी खोलिया गांव के दिव्यांग पुत्र खड़क जंग सिंह पाल ने सेनानी के पैतृक आवास को स्मारक बनाने की मांग उठाई है। उन्हें अब तक कुटुंब पेंशन का भी लाभ नहीं मिल पाया है। इससे आहत सेनानी के पुत्र ने आत्मदाह की चेतावनी दी है।
सेनानी नरेंद्र सिंह पाल और उनकी पत्नी की 25 फरवरी 1981 को चर्मा के पास रोडवेज बस हादसे में मौत हो गई थी। तब शवदाह के लिए चार हजार रुपये की आर्थिक सहायता मिली थी, लेकिन उनके पुत्र को बस दुर्घटना का मुआवजा नहीं मिला। सेनानी के बड़े बेटे राजेंद्र सिंह पाल और पुष्कर सिंह पाल ने प्रथम पीढ़ी को आर्थिक सहायता दिलाने के लिए कई जगह पत्राचार किया, लेकिन अब उनकी भी मौत हो गई है।
तीसरे बेटे खड़क जंग सिंह पाल दिव्यांग हैं। वह 10 वर्ष से बरेली में इलाज करा रहे हैं। उन्होंने कुटुंब पेंशन और आर्थिक सहायता दिलाने के लिए राज्यपाल, मुख्य सचिव, नेता प्रतिपक्ष इंदिरा हृदयेश के साथ ही उत्तराखंड स्वतंत्रता संग्राम सेनानी समिति से भी पत्राचार किया, लेकिन अब तक कोई सहायता नहीं मिली।