प्राइवेट पब्लिक पार्टनरशिप (पीपीपी) मोड में संचालित मुनस्यारी का सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र मरीजों के लिए मुसीबत बन गया है। अस्पताल में एक हफ्ते से महिला डॉक्टर नहीं है। डॉक्टर को अवकाश में बताया जा रहा है, जिस कारण प्रसव पीड़ित महिलाओं के साथ ही नवजात शिशुओं को 120 किलोमीटर दूर जिला मुख्यालय रेफर कर दिया जा रहा है।
सोमवार को रांथी निवासी भावना देवी पत्नी रवींद्र, जलथ निवासी कांति देवी पत्नी नवीन सिंह, मुनस्यारी निवासी मीना देवी पत्नी दीपक सिंह को परिजन प्रसव के लिए मुनस्यारी अस्पताल लाए थे। प्रसव पीड़िताओं को अस्पताल में देखा तक नहीं गया, महिला डॉक्टर न होने की बात कहकर जिला अस्पताल रेफर कर दिया गया। खसियाबाड़ा निवासी योगिता अपने नवजात शिशु को लेकर अस्पताल पहुंची थी, शिशु को सांस लेने में परेशानी हो रही थी। उन्हें भी डॉक्टर न होने की बात कहकर अस्पताल प्रबंधन ने रेफर कर दिया। अस्पताल की अव्यवस्थाओं को लेकर जनता में रोष हैं। लोगों का कहना है कि अस्पताल प्रबंधन लोगों को सुविधा नहीं दे रहा है। आए दिन डॉक्टर न होने की बात कहकर मरीजों को रेफर कर दिया जाता है।
अस्पताल की व्यवस्थाओं का अंदाज इसी बात से लगाया जा सकता है कि प्रबंधन एक अदद जनरेटर अस्पताल में नहीं लगवा पाया है। बिजली न होने पर मरीज मोमबत्ती के उजाले में रहते हैं। अस्पताल प्रबंधक उत्कर्ष गंगवार कहते हैं कि महिला डॉक्टर अवकाश पर गईं हैं, जल्द ही ड्यूटी पर आ जाएंगी। जनरेटर के सवाल पर उनका कहना था कि प्रस्ताव गया है। मंजूरी मिलते ही जनरेटर लग जाएगा।