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मुख्यमंत्री दुर्भाग्यपूर्ण बयान दे रहे : टम्टा

Mon, 19 Jun 2017 10:43 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला ब्यूरो, पिथौरागढ़।
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कांग्रेस का उपवास - फोटो : अमर उजाला
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पिथौरागढ़। कांग्रेसियों ने सोमवार को डीएम कार्यालय में उपवास रखा। राज्यसभा सदस्य प्रदीप टम्टा भी धरने पर बैठे। कांग्रेसियों ने बेड़ीनाग के डोलडुंगरी निवासी किसान सुरेंद्र सिंह की आत्महत्या के चार दिन बाद भी प्रदेश सरकार की ओर से पीड़ित परिवार को मुआवजा न दिए जाने पर रोष जताया। उन्होंने प्रभावित परिवार का बैंक ऋण माफ करने की मांग की। अन्यथा चंदा एकत्र कर मृतक के परिवार का कर्ज चुकाने की बात कही है।
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सांसद टम्टा ने कहा कि घटना के चार दिन बाद भी राज्य सरकार का कोई प्रतिनिधि पीड़ित परिवार से मिलने नहीं पहुंचा। किसान की मौत पर मुख्यमंत्री त्रिवेंद्र सिंह रावत ने स्वयं को 11 लाख रुपये का कर्जदार बताने के साथ ही किसान का सुसाइड नोट न होने जैसा दुर्भाग्यपूर्ण बयान दिया। पूर्व विधायक मयूख महर, नारायण राम आर्य ने कहा कि राज्य सरकार वास्तव में किसानों की हितैषी है तो वह राज्य के किसानों का ऋण माफ करे। कांग्रेस जिलाध्यक्ष मुकेश पंत ने कहा कि भाजपा के राज में सीमा पर रोज सैनिक शहीद हो रहे हैं। ऋण न चुका पाने के कारण किसान आत्महत्या कर रहे हैं।

भाजपा के लोग केंद्र सरकार के तीन साल पूरे होने का जश्न मना रहे हैं। कहा गया कि राज्य सरकार मृतक किसान के परिवार को राहत नहीं दे रही है। कांग्रेस किसान के परिवार के लिए चंदा एकत्र करेगी। उनका कर्ज खुद चुकाएगी। उपवास में ब्लॉक प्रमुख अंजू लुंठी, पालिकाध्यक्ष जगत सिंह खाती, प्रदेश सचिव प्रदीप पाल, रमेश पुनेड़ा, एडवोकेट कृष्णा सिंह बिष्ट, हीरा बिष्ट, महेश डसीला, पवन माहरा, खीमराज जोशी, महेश मखोलिया आदि थे।
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बेड़ीनाग (पिथौरागढ़)। पुरानाथल के निकट डोलडुंगरी गांव के किसान सुरेंद्र सिंह के घर के आगे एकत्र होकर गांव के लोगों ने प्रदर्शन किया। कर्ज में डूबे सुरेंद्र सिंह ने जहर खाकर आत्महत्या कर दी थी। गांव के लोगों का कहना है कि सुरेंद्र की मौत के लिए प्रदेश सरकार जिम्मेदार है और सरकार की इसी नीति के कारण एक गरीब के परिवार पर गंभीर संकट आ गया है। गांव के लोगों का कहना है कि सरकार के किसी मंत्री या प्रतिनिधि ने किसान के परिवार की सुध नहीं ली है।

सबका साथ सबका विकास के नाम पर जगह जगह कार्यक्रम आयोजित कर रही सरकार को यह पता नहीं है कि उसके राज में किस तरह विकास हो रहा है। गांव के लोग इतने गुस्से में हैं कि वह अब आंदोलन की कमान खुद संभालना चाहते हैं। गांव के लोगों का कहना है कि एक अल्पसंख्यक समाज के प्रति सरकार का रवैया ठीक नहीं है। मुख्यमंत्री और उनके मंत्री तरह तरह के बयान देकर जले में नमक छिड़कने का काम कर रहे हैं। प्रदर्शन में बुजुर्ग, बच्चे, महिलाएं शामिल हुई। 

थल (पिथौरागढ़)। बेड़ीनाग तहसील के पुरानाथल में किसान सुरेंद्र सिंह की आत्महत्या से जिले के सभी किसान बेहद आहत हैं। पहाड़ में किसानों के पास बहुत कम जमीन बची है। अधिकतर असिंचित है। उस पर बोई जाने वाली फसल कभी सूखे से तो कभी बाढ़ की चपेट में आकर नष्ट हो जाती है। ओलों की मार कब पड़ जाए कहा नहीं जाता। 

सरकारों ने मुआवजे के जो मानक बनाए हैं वह पहाड़ के किसानों को कोई राहत नहीं देते। अगर यहां ओलावृष्टि से फसल नष्ट हो जाए तो मुआवजा तो दूर सर्वे तक नहीं होता। पहाड़ों में वैसे भी खेतीबाड़ी घटती जा रही है। लोगों ने गांव छोड़ दिए हैं। जमीन बंजर पड़ती जा रही है। कुछ लोग खेतीबाड़ी का काम तो कर रहे हैं लेकिन उनको सरकार से कोई मदद नहीं मिलती। बैंकों से कर्ज लेकर फसल बोने वाले किसानों के सामने कर्ज अदा करने का संकट आ जाता है।

थल। कुमालगांव निवासी किसान पान सिंह देउपा का कहना है कि सरकार के एजेंडे में किसान शामिल ही नहीं है। यदि किसानों के लिए ठोस योजना बनती और घोषणा होने के बाद उन पर अमल होता तो किसी किसान को जहर खाकर जान देने की नौबत नहीं आती। वह तो यहां तक कहते हैं कि अब भी क्या गारंटी है कि मृतक किसान सुरेंद्र सिंह का बैंक कर्ज माफ हो जाएगा। 

थल। रिठायत गांव निवासी किसान हयात सिंह सामंत का कहना है कि सरकार मुआवजा देने के लिए सिर्फ हल्ला मचाती है। सूखा, आपदा के समय मिलने वाली मुआवजा राशि इतनी कम होती है कि उसे लेने में ही शर्म लगती है। वह कहते हैं कि यदि किसान के प्रति सरकार की संवेदना होती तो नीतियों में बदलाव हो जाता और किसान के तनाव में आने की नौबत नहीं आती। 

थल। लेजम निवासी किसान रमेश राम का कहना है कि किसी किसान की आत्महत्या जैसी घटना के बाद यह जिम्मेदारी तय हो। वह कहते हैं कि किसान पूरे देश में परेशान हैं जबकि सभी की भूख मिटाने का काम किसान कर रहे हैं। सुरेंद्र सिंह की आत्महत्या के मामले में जिम्मेदार लोगों के खिलाफ कार्रवाई होनी चाहिए। साथ ही यह जांच की जाए कि किसान को किसने परेशान किया। 

थल। धारगांव निवासी बलवंत मेहता का कहना है कि आगे भी ऐसे सिलसिले रुक जाएंगे इसकी कोई गारंटी नहीं है, क्योंकि घटना के बाद सरकार की तरफ से जिस तरह के बयान आ रहे हैं उससे यह साफ जाहिर है कि सरकार पर इस हादसे का कोई फर्क ही नहीं पड़ा है। पहाड़ के किसान को खुद ही जागना होगा और अपने हक के लिए सरकार पर दबाव बनाना होगा। 
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