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मुनस्यारी के बसंतकोट और चंपावत के पाटी में महिला कर रही हैं स्वर्ण हल्दी की खेती

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चंपावत के पाटी में महिलाएं स्वर्ण हल्दी की खेती की जा रही है। - फोटो : PITHORAGARH
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पिथौरागढ़। जिले के बसंतकोट मुनस्यारी और चंपावत जनपद के पाटी में महिलाएं स्वर्ण हल्दी (गोल्ड टरमरिक) की खेती कर रही हैं। इस हल्दी में मैदानी क्षेत्रों में होने वाली हल्दी से दोगुना कर्क्यूमिन होता है। इसकी खेती से महिलाओं की आय में सुधार हो रहा है। महिलाओं की ओर से उत्पादित स्वर्ण हल्दी से मसालों के साथ-साथ चाय भी बनाई जा रही है।
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‘प्राइड ऑफ हिमालया’ पिथौरागढ़ जिले के मुनस्यारी विकासखंड में छह एकड़ भूमि और चंपावत के पाटी में पांच एकड़ भूमि पर महिलाएं स्वर्ण हल्दी की खेती कर रही हैं। दोनों स्थानों पर 200 से अधिक महिलाएं इसकी खेती से जुड़ी हैं। प्राइड ऑफ हिमालया के मैनेजर सौरभ वर्मा ने बताया कि स्वर्ण हल्दी की खेती के लिए ऐसे स्थानों को चुना गया है, जहां पहले हल्दी की खेती होती थी, लेकिन कुछ सालों से उत्पादन बंद था। उन्होंने कहा कि सामान्य हल्दी की खेती वाले स्थानों में इसकी खेती सही नहीं है क्योंकि ब्रीड चेंज होने का खतरा रहता है। इसे देखते हुए कई सालों तक टीम ने शोध किया कि कैसे इस हल्दी के प्राकृतिक गुण को बरकरार रखा जा सकता है। इसके लिए जगह-जगह पर मिट्टी के नमूने लेकर लैब टेस्ट किए गए, जिसमें चंपावत के पाटी और मुनस्यारी के बसंतकोट में इसकी खेती करने का निर्णय लिया गया। उन्होंने बताया कि दोनों स्थानों पर महिलाएं इसकी खेती कर रही हैं। अल्मोड़ा के धौलादेवी में भी शीघ्र इसकी खेती शुरू की जाएगी।
कैंसर से लड़ने में सहायक है स्वर्ण हल्दी
सामान्य हल्दी और मैदानी क्षेत्रों में उत्पादित हल्दी में चार से पांच प्रतिशत कर्क्यूमिन होता है। लेकिन स्वर्ण हल्दी में आठ से 10 प्रतिशत कर्क्यूमिन होता है। कर्क्यूमिन ऐसा एंटीऑक्सीडेंट है जो शरीर को कैंसर जैसे रोगों से बचाता है। साथ ही घाव भरने, सूजन कम करने में इसका प्रयोग किया जाता है। इसमें फफूंदीनाशक गुण भी होते हैं। प्राइड ऑफ हिमालया के हिमांशु जोशी ने बताया कि हल्दी की एक उत्तम चाय बनती है। उन्होंने कहा इसकी खेती के लिए लोगों को प्रेरित किया जा रहा है। इसके लिए बीज उपलब्ध कराए जा रहे हैं।
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जंगली जानवर भी नहीं पहुंचाते हैैं नुकसान
हल्दी को खेती को जंगली जानवर भी नुकसान नहीं पहुंचाते हैं। इसकी खेती में किसानों को दिक्कत भी नहीं होती है। इसमें सिंचाई आदि की भी दिक्कत नहीं होती है। इसको बाजार में भी काफी मांग है।
पहाड़ी क्षेत्रों में होने वाली हल्दी की तीन साल बाद खुदाई होने के बाद इसे स्वर्ण हल्दी नाम से जाना जाता है। इसके बीज के लिए लोग प्राइड ऑफ हिमालया में संपर्क कर सकते हैं। स्वर्ण हल्दी बहुत लाभकारी है इसकी बाजार में काफी मांग है। - डॉ. हेमंत कुमार पांडेय, वरिष्ठ वैज्ञानिक डीआरडीओ पिथौरागढ़।
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