नाचनी के तल्ला भैसकोट में सूखे खेत पर उदास बैठे किसान केशर सिंह। संवाद
नाचनी (पिथौरागढ़)। रबी की बुआई के बाद तीन माह से बारिश नहीं होने से सैकड़ों हेक्टेयर फसल सूखने के कगार पर है। किसान उम्मीद भरी निगाहों से आसमान की ओर टकटकी लगाए हैं।
इस बाद जाड़ों में बारिश नहीं होने से फसलें जमीन से ऊपर नहीं आ पाई हैं। इससे किसानों को चिंता होने लगी है। सिंचाई की सुविधा नहीं होने से किसान परेशान हैं। तल्ला जोहार के पचास गांवों में से तल्ला भैसकोट, बांसबगड़, मल्ला भैसकोट, क्वीटी, मडलकिया, मोडम समेत 14 गांवों में सिंचाई नहरें हैं। इनमें भी अधिकतर क्षतिग्रस्त हैं।
नरिंगुनिया के प्रगतिशील किसान त्रिलोक सिंह सामंत ने बारिश पर निर्भर रहने वाले क्षेत्र को सूखाग्रस्त घोषित करने के साथ सभी किसानों को मुआवजा दिए जाने की मांग उठाई है। इधर, सिंचाई विभाग के जेई सुंदर सिंह बिष्ट का कहना है कि आपदा से क्षतिग्रस्त चौदह गांवों की नहरों का प्रस्ताव प्रशासन को भेजा है। अभी स्वीकृति नहीं मिली है। स्वीकृति मिलने के बाद नहरों की मरम्मत का कार्य किया जाएगा।
बारिश न होने, पाला गिरने से लोग और किसान बेहाल
चंपावत। जिले में पाले से जहां लोग बेहाल हैं वहीं किसान परेशान हैं। बाराकोट ब्लॉक के पम्दा गांव में पाले और कड़ाके की ठंड से लोगों को मुश्किलों का सामना करना पड़ रहा है। पहाड़ों पर आमतौर पर अक्तूबर-नवंबर में गेंहू और सरसों की फसल बोई जाती है। इस बार बारिश नहीं होने और अत्यधिक पाला पड़ने से अभी तक खेतों में फसल उग नहीं पाई है। पहाड़ों पर कई जगहों पर लोगो ने पारंपरिक खेती करना पहले से ही बंद कर दिया है। रही-सही कसर मौसम के मिजाज ने पूरी कर दी है। पम्दा गांव निवासी जगदीश जोशी ने बताया कि उन्होंने नवंबर में गेहूं की फसल बोई थी लेकिन सिंचाई नहीं होने से अभी तक बीज में अंकुर नहीं बन पाए हैं। संवाद