फावड़े और कुदाल लेकर एसडीएम आवास के सामने प्रदर्शन करते जाखपंत के लोग
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खनन के दौरान निकले मलबे से नहर ध्वस्त होने पर जाखपंत गांव के किसान भड़क गए और फावड़े, कुदाल लेकर रविवार को एसडीएम एसके पांडे के आवास पर जा धमके। पहले इन किसानों ने जिलाधिकारी के आवास पर जाने का फैसला लिया था, लेकिन जिलाधिकारी मुख्यालय से बाहर होने के कारण इन किसानों ने एसडीएम के आवास पर जाने का फैसला लिया।
तहसील मुख्यालय से करीब 20 किलोमीटर दूर जाखपंत गांव के किसान रविवार सुबह खेतों तक पानी पहुंचाने के लिए नहर की मरम्मत को गए। जब किसानों ने नहर को देखा तो खनन के दौरान निकले मलबे के कारण 200 मीटर हिस्सा पूरी तरह ध्वस्त हो गया था। इस पर वह भड़क गए और नहर की मरम्मत में समय बर्बाद करने के बजाय सीधे जिलाधिकारी से मिलने का फैसला ले लिया। सभी किसान नहर की मरम्मत के लिए लाए गए उपकरणों के साथ जिलाधिकारी के आवास को निकल गए, लेकिन डीएम के नहीं होने पर वह एसडीएम के पास पहुंचे।
गांव के सरपंच रामीराम, क्षेत्र पंचायत के पूर्व सदस्य फकीर सिंह धामी, सतीश चंद्र पंत के नेतृत्व में पहुंचे किसानों ने एसडीएम को बताया कि इस सीजन में जाखपंत के लोग अपनी 400 नाली जमीन पर मसूर की बुआई करते हैं। बुआई करने से पहले खेतों तक पानी पहुंचाना जरूरी होता। पिछले साल भी उन्होंने बुआई से पहले श्रमदान के जरिए नहर की मरम्मत की थी। इस बार भी इसी इरादे से वह लोग नहर की मरम्मत के लिए पहुंचे थे। इन लोगों ने बताया कि नहर मलबे से इस कदर पट गई है कि उसे सुधारने में कई दिन लग जाएंगे। गांव के मदन मोहन, प्रेम राम, कमानी राम आदि ने कहा कि यदि प्रशासन को खनन कराना ही है तो गांव की सिंचाई और पेयजल योजनाओं को नष्ट न किया जाए। इस बार यदि समय पर खेतों में पानी नहीं पहुंचा तो मसूर की बुआई नहीं हो पाएगी।
एसडीएम एसके पांडे ने खनन ठेकेदार को आदेश दिए कि वह क्षतिग्रस्त नहर की मरम्मत अपने मजदूरों के माध्यम से कराए। साथ ही एसडीएम ने राजस्व उपनिरीक्षक को गांव में भेजकर खनन ठेकेदार को यह निर्देश देने को कहा कि वह खनन करते समय किसी प्रकार का नुकसान न करे। बताया गया कि शासन ने जाखपंत गांव में खनन का पट्टा जारी किया है। पहले भी गांव के लोगों ने इसका विरोध किया था, लेकिन शासन के फैसले के सामने उनको आंदोलन वापस लेना पड़ा था। अब गांव के लोग खनन के कारण नई समस्या में फंस गए हैं।