नाचनी(पिथौरागढ़)। सीमांत जिले के गांवों की अधिकतर सड़कें बदहाल और बंद हैं। इन पर किसी की नजर नहीं पड़ रही है। होकरा-नामिक सड़क भी इन्हीं में शामिल है। जब सिस्टम ने इन सड़कों की सुध नहीं ली तब ग्रामीणों ने खुद टूटे कलवर्ट पर काठ का पुल तैयार कर इस पर आवाजाही सुगम बनाई।
अब ग्रामीण बीमारों को आसानी से अस्पताल पहुंचा पा रहे हैं। ग्रामीणों ने सिस्टम को आइना दिखाते हुए उस पर सवाल भी खड़े किए हैं।
होकरा-नामिक सड़क पर करीब तीन महीने पूर्व कुणारौली गधेरे में बना कलवर्ट टूट गया था इससे वाहनों की आवाजाही ठप हो गई। तब से नामिक की डेढ़ हजार से अधिक की आबादी कुणारौली तक तीन किलोमीटर का पैदल सफर तय कर रही है तब जाकर लोगों को वाहन नसीब हो रहा है। मानसूनकाल में ग्रामीणों की दिक्कत तब बढ़ गई जब टूटे कलवर्ट पर किसी की नजर नहीं पड़ी और वहां उफनते गधेरों को पार कर बीमारों, गर्भवतियों को दूसरी तरफ ले जाना मुश्किल हुआ। ग्रामीण बीमारों और गर्भवतियों को पहाड़ी पर चढ़कर उफनते नाले को पार कर रहे थे इसमें जान का खतरा बना हुआ था। अपनों की सुरक्षा और परेशानी को देखते हुए ग्रामीणों ने खुद ही इस गंभीर समस्या का समाधान करने का मन बनाया। सभी ने एकजुट होकर श्रमदान से उफनते गधेरे पर लकड़ी का पुल तैयार कर आपदा प्रभावितों को राहत पहुंचाने के दावों की हकीकत बयां करते हुए सिस्टम को आइना दिखाया है। अब ग्रामीण लकड़ी के पुल के सहारे बीमारों और गर्भवतियों को आसानी से उफनते गधेरे को पार कराकर उन्हें अस्पताल पहुंचा पा रहे हैं।