आपदा की गहरी चोट खाने के बाद जिस तरह बस्तड़ी के लोगों को फिर से खड़ा होने के लिए चारों तरफ से सहयोग की पहल हुई है, उससे बस्तड़ी के नौजवानों में उम्मीद जागी है कि एक नया बस्तड़ी जरूर बनेगा। अमर उजाला की पहल का स्वागत करते हुए नौजवानों ने कहा कि इसी पहल के बाद अन्य लोग भी आगे आने लगे हैं।
युवाओं का कहना है कि अपनी जमीन और जगह को छोड़ने का दर्द सभी को होता है। इस बार प्रकृति ने ऐसी परिस्थिति पैदा कर दी कि लोगों को अपने पुश्तैनी मकान खोने पड़े। अब जब बस्तड़ी के लिए नई जगह का चयन हो गया है तो जल्द ही एक नया बस्तड़ी जरूर बन जाएगा।
अमर उजाला की पहल का स्वागत
बस्तड़ी निवासी युवा विनीत भट्ट कहते हैं कि बस्तड़ी के लोगों के दुख-दर्द को कम करने के लिए अमर उजाला ने जो पहल की है वह स्वागत योग्य है। अमर उजाला की अपील का देश के लोगों पर जरूर असर पड़ेगा। नया बस्तड़ी बसाने में इससे काफी मदद मिलेगी। वह कहते हैं कि युवाओं का मनोबल इससे काफी बढ़ा है। यह देश के अन्य आपदा पीड़ितों के लिए भी बड़ा संदेश है।
युवाओं को मनोबल ऊंचा रखना होगा
बस्तड़ी निवासी युवा योगेश भट्ट कहते हैं कि युवाओं को आपदा से घबराना नहीं चाहिए। उनको मनोबल ऊंचा रखना होगा। इसी मनोबल के सहारे हम विपत्ति से लड़ने की ताकत प्राप्त करेंगे। वह कहते हैं कि आपदा में कई नौजवान साथियों को खोया है, लेकिन प्रकृति की इस मार से विचलित होने की जरूरत नहीं है। सभी नौजवानों को संगठित होकर नया बस्तड़ी बसाने में सहयोग देना होगा।
आपदा से लड़ने की ताकत मिली
बस्तड़ी निवासी नौजवान मुकेश भट्ट का कहना है कि आपदा से लड़ने की ताकत लोगों के सहयोग से ही मिली है। आपदाओं से कई जिंदगियां समाप्त हो जाती हैं। लोगों की संपत्ति नष्ट हो जाती है, लेकिन यदि लोगों का सहयोग मिलने लगे तो पुराने कष्ट भूल जाते हैं। वह कहते हैं कि नया बस्तड़ी बसाने की इस मुहिम में अब हर वर्ग का सहयोग मिल रहा है।
हम दुनिया को नया संदेश देंगे
बस्तड़ी निवासी सुशील भट्ट ने कहा कि आपदा से पूरी तरह तबाह होने के बाद भी बस्तड़ी के लोग दुनिया को यह संदेश देना चाहते हैं कि हम विचलित नहीं हैं। इन कष्टों को सहने की अपार क्षमता हमारे पास है। हम दुनिया को दिखा देंगे कि नया बस्तड़ी कैसे बसा और उसमें किस तरह से फिर से जीवन लौटा। वह कहते हैं कि बस्तड़ी के सभी लोग पूरी ताकत के साथ नया बस्तड़ी बसाकर ही रहेंगे।