पिथौरागढ़। पहाड़ी जिले के पानी में मैग्नीशियम और चूने की अधिक मात्रा लोगों को पथरी का मरीज बना रही है। अंदाजा लगाया जा सकता है कि जिला अस्पताल में हर रोज पथरी के पांच से अधिक मरीज पहुंच रहे हैं। इन मरीजों का दबाव बढ़ने से ऑपरेशन के लिए वेटिंग शुरू हो चुकी है। जल निगम की जांच में भी अधिकांश पेयजल स्रोतों के पानी में इन खनिजों की अधिक मात्रा सामने आई है।
सीमांत जिले में 1400 प्राकृतिक जल स्रोतों से संचालित होने वाली पेयजल योजनाएं बढ़ी आबादी की प्यास बुझाती हैं। जल निगम समय-समय पर इन प्राकृतिक जल स्रोतों के पानी की जांच करवाता है। पिछले साल हुई जांच में सामने आया है कि करीब 70 फीसदी जल स्रोतों के पानी में मैग्नीशियम और चूने की अधिकता है। यह पानी लोगों में पथरी की दिक्कत पैदा कर रहा है। जिला अस्पताल प्रबंधन के मुताबिक पथरी के मरीज बढ़े हैं। मार्च तक जिला अस्पताल प्रबंधन ने संबंधित मरीजों को ऑपरेशन के लिए तारीख दी है। अब अन्य मरीजों का अप्रैल महीने में ऑपरेशन होगा। विशेषज्ञ भी मान रहे हैं कि पानी में खनिजों की अधिकता लोगों में पथरी का कारण बन रहा है।
पानी में 70 मिलीग्राम मैग्मीशियम तो 80 मिलीग्राम से अधिक है चूना
जल संस्थान के मुताबिक अधिकांश प्राकृतिक जल स्रोतों में 70 मिलीग्राम मैग्नीशियम तो 80 मिलीग्राम प्रति लीटर चूना है। चूने और मैगनीज के पहाड़ों के बीच पानी का बहाव इसका कारण है। मानकों के लिहाज से पानी में 30 मिलीग्राम मैग्नीशियम तो 75 मिलीग्राम प्रति लीटर कैल्शियम यानि चूना होना चाहिए।
कोट
पथरी के मरीज बढ़े हैं। दबाव बढ़ने से संबंधित मरीजों को ऑपरेशन के लिए तारीख दी जा रही है। हर मरीज को स्थानीय स्तर पर बेहतर स्वास्थ्य सुविधा मिले इसके लिए अस्पताल प्रबंधन गंभीर है। - डॉ. भागीरथी गर्ब्याल, पीएमएस, जिला अस्पताल, पिथौरागढ़
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प्राकृतिक जल स्रोतों के पानी की समय-समय पर जांच होती है। अधिकांश जल स्रोतों में मैग्नीशियम और चूने की मात्रा अधिक है। इसमा कारण जिले की भौगोलिक परिस्थितियां हैं। - रंजीत धर्मसक्तू, अधीक्षण अभियंता, जल निगम, पिथौरागढ़