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Pithoragarh News: शरीर की उलझन सब जानें, मन की कौन पहचाने

Tue, 25 Nov 2025 10:55 PM IST
हल्द्वानी ब्यूरो संवाद न्यूज एजेंसी, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़। कहते हैं स्वस्थ शरीर में स्वस्थ मन निवास करता है। मन यदि बीमार हो तो शरीर भी साथ छोड़ता है। बात मानसिक स्वास्थ्य की हो रही है, इसकी सीमांत जिले में चिंताजनक स्थिति है। हिमालय के नजदीक हरे-भरे जंगलों के बीच बसे जिले में भी लोग तेजी से मानसिक रोग की जकड़ में आ रहे हैं। अंदाजा लगाया जा सकता है कि पिछले आठ महीने में 2200 लोग मनोविकारों के इलाज के लिए मनोरोग चिकित्सक के पास पहुंचे हैं।
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मानसिक रोग विभाग के मुताबिक, इनमें सबसे ज्यादा 25 से 45 आयु वर्ग के युवा शामिल हैं। विशेषज्ञ के मुताबिक, हर दिन 15 से अधिक मानसिक रोगी इलाज के लिए पहुंच रहे हैं। अधिकांश मरीज उदासी-निराशा, चिंता, बाइपोलर डिसऑर्डर (व्यक्ति के मूड, ऊर्जा और गतिविधि के स्तर पर बहुत ज्यादा उतार-चढ़ाव) और सीजोफ्रेनियां जैसी मानसिक बीमारियों से जूझ रहे हैं। ऐसे मरीज आत्मघाती कदम भी उठाते हैं। मनोचिकित्सक के पास माह में 4-5 लोग सुसाइडल टेंडेंसी वाले पहुंचते हैं।
मानसिक रोग विशेषज्ञ डॉ. ललित भट्ट ने बताया कि अधिकतर लोग अपनी या अपने परिजनों की मानसिक परेशानियों को किसी को बताने में झिझकते हैं जो गलत है। कई लोगों में शक करने की बीमारी घर कर रही है जो मानसिक विकार को जन्म देता है। बताया कि युवा शादी न होने, शादी के बाद आपसी कलह और रोजगार न मिलने से भी मानसिक रोग की जकड़ में आ रहे हैं। डॉ. ललित भट्ट ने बताया कि मानसिक रोग के लक्षण दिखने पर छिपाना नहीं चाहिए। कम से कम अपने जानने वालों से उस बारे में बात करनी चाहिए। कई बार शुरुआती दौर में बातचीत से ही समस्या का हल निकल आता है।
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मोबाइल फोन और नशे की लत भी मानसिक विकार
बच्चों, युवाओं में मोबाइल फोन, नशे की लत भी मानसिक विकार हैं। डॉ. ललित भट्ट ने बताया कि मोबाइल फोन का इस्तेमाल कम करना, नशे को छोड़ परिवार और मित्रों के साथ समय बिताना, आउट डोर गेम खेलना आदि गतिविधियां मानसिक रोगों की जकड़ से बाहर आने में काफी सहायक हैं। बच्चों को समय रहते इस तरह की समस्या से बचाने के लिए परिजनों को उचित कदम उठाने चाहिए।
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स्ट्रेस को ठीक करना जरूरी
पिथौरागढ़। स्ट्रेस (मानसिक दबाव) को ठीक कर बहुत सारी मानसिक विकृतियों से बचा जा सकता है। स्ट्रेस होने पर कोई काम ठीक से नहीं हो पाता। धीरे-धीरे यह एंक्जाइटी, डिसऑर्डर और डिप्रेशन में बदलने लगता है। डॉ. ललित के अनुसार धूप कम होना, बरसाती सीजन और ठंड में मानसिक विकार ज्यादा बढ़ जाते हैं।
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मानसिक स्वास्थ्य समस्या के ये हो सकते हैं लक्षण
अत्यधिक उदासी, निराशा, उत्साह में कमी, पुरानी यादों से या अकेले रहने से घबराना, अत्यधिक चिंता, दिल तेजी से धड़कना, पसीना आना, बार-बार हाथ या कपड़े धाेते रहना या घर की सफाई करते रहना, अकेले में हंसना, बड़बड़ाना, शक करना, आत्महत्या के लिए विचार आना, अधकपाल, छोटे-छोटे अंतराल में सिर दर्द होना, उल्टा-सीधा बोलना, गुस्सा अधिक आना, स्वयं से बातें करना, आवाजें सुनाई देना, नशे का आदी होना आदि।
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