पिथौरागढ़। टीबी मुक्त अभियान के तहत क्षय रोगियों की पहचान के लिए घर-घर हो रही जांच ने स्वास्थ्य विभाग की चिंता बढ़ा दी है। सीमांत जिले में चिंताजनक हालात सामने आए हैं। बीते एक महीने में 100 लोगों की हुई जांच में हर तीसरा व्यक्ति टीबी से ग्रसित मिला है। विशेषज्ञों के मुताबिक इससे साफ है कि गांवों में टीबी के कई मरीज हैं। यदि वे सामने नहीं आए तो इस बीमारी के उन्मूलन के बजाय यह महामारी का रूप ले सकती है।
देश में वर्ष 2025 तक टीबी उन्मूलन का लक्ष्य तय है जो साकार होता नजर नहीं आ रहा है। स्वास्थ्य विभाग के मुताबिक राष्ट्रीय कार्यक्रम टीबी मुक्त अभियान के तहत बीते सात दिसंबर से जिले के गांवों में जांच कर टीबी मरीजों की पहचान शुरू हुई।
साल के अंत तक 1000 लोगों की जांच में 30 टीबी के मरीज सामने आए। वर्तमान में जिले की आबादी करीब पांच लाख है। विशेषज्ञों के मुताबिक जैसे-जैसे जांच का दायरा बढ़ेेगा तो निश्चित तौर पर टीबी से ग्रसित लोगों की संख्या बढ़ सकती है। विशेषज्ञों का कहना है कि यदि संदिग्धों के साथ ही टीबी मरीज उपचार के लिए सामने नहीं आए तो इसका उन्मूलन कठिन हो जाएगा और भविष्य में यह बीमारी महामारी का रूप ले सकती है।
पांच साल में टीबी के 2814 मरीज चिन्हित
पिथौरागढ़। सीमांत जिले में टीबी मरीजों के सामने आने की रफ्तार कम होने की बजाय बढ़ रही है। हालांकि विभाग इसके पीछे की वजह जांच बढ़ना बता रहा है। विभागीय आंकड़ों के मुताबिक पांच साल में जिले में 2814 टीबी मरीज सामने आए हैं। वर्ष 2020 में 357 तो वर्ष 2024 में 620 टीबी के मरीज सामने आए हैं जो कि चिंता का विषय है। संवाद
परवान नहीं चढ़ पा रही निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को गोद लेने की योजना
पिथौरागढ़। निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को गोद लेने की योजना भी परवान नहीं चढ़ पा रही है। क्षय रोग विभाग के मुताबिक सीमांत जिले में अब तक एक भी निक्षय मित्र सामने नहीं आ सका है। ऐसे में टीबी मरीजों को उचित पोषण देने के लिए स्वास्थ्य विभाग के 25 चिकित्सकों ने जिम्मेदारी संभाली है। सरकार टीबी उन्मूलन में भागीदारी निभाने के लिए संभ्रांत लोगों से निक्षय मित्र बनकर टीबी मरीजों को उचित पोषण मुहैया कराने को आगे आने की अपील कर रही है। सीमांत जिले में अब तक एक भी निक्षय मित्र टीबी मरीजों को नहीं मिल सका है। संवाद
यह हैं टीबी के लक्षण
- अधिक दिनों तक खांसी
- बलगम या इसके साथ रक्त का आना
- अचानक वजन घटना
- थकान महसूस होना
- अक्सर बुखार आना।
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बचाव
- साफ-सफाई का ध्यान रखना
- लंबे समय तक खांसी होने पर चिकित्सक की सलाह
- खांसते-छींकते समय रुमाल का प्रयोग करना
- भीड़ से दूरी बनाए रखना
- टीबी रोगी के संपर्क में आने पर सावधानी बरतना
- पौष्टिक और संतुलित आहार लेना
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बीते पांच साल में टीबी मरीजों की संख्या
वर्ष टीबी मरीज
2020 357
2021 467
2022 350
2023 580
2024 620
कोट-
निश्चित तौर पर गांवों में टीबी के मरीज छुपे हैं। संदिग्ध और इससे ग्रसित मरीजों को खुद सामने आकर उपचार कराना चाहिए। यदि ऐसा नहीं हुआ तो यह बीमारी महामारी का रूप भी ले सकती है। जिले में अब तक एक भी निक्षय मित्र टीबी मरीजों की सहायता के लिए आगे नहीं आया है। जांच बढ़ने से भी टीबी के अधिक मरीज सामने आ रहे हैं। तय लक्ष्य तक टीबी उन्मूलन के लिए विभाग गंभीरता से काम कर रहा है। - डॉ. ललित भट्ट, जिला क्षय रोग अधिकारी, पिथौरागढ़।