बंगापानी (पिथौरागढ़)। तहसील क्षेत्र के दूरस्थ ग्राम पंचायत मेतली के ग्रामीणों के लिए स्वास्थ्य सुविधा के नाम पर कुछ भी नहीं हैं। 1500 से अधिक की आबादी वाले इस गांव के लोग इलाज के लिए आठ से 10 किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचते हैं। गंभीर बीमार या घटना में घायल होने पर ग्रामीणों के लिए डोली ही एकमात्र सहारा बनती है।
आजादी के सात दशक बाद भी बंगापानी तहसील क्षेत्र का मेतली गांव सड़क और स्वास्थ्य सुविधा से नहीं जुड़ पाया है। दुर्गम क्षेत्र में बसे इस गांव के ग्रामीणों को आए दिन तमाम दिक्कतों से जूझना पड़ता है। गांव तक पहुंचने के लिए पैदल मार्ग ही एकमात्र सहारा है। ऐसे में ग्रामीणों के लिए बरसात के दिनों में पैदल मार्ग से आवाजाही करना जान जोखिम में डालने के बराबर हो जाता है। पहाड़ियों से पत्थर गिरने का भय लगातार बना रहता है। सड़क नहीं होने से 15 सौ से अधिक की आबादी वाले इस गांव के ग्रामीणों को इलाज के लिए आठ से 10 किमी पैदल चलकर सड़क तक पहुंचना पड़ता है। ग्रामीणों के मुताबिक कई बार गांव में मरीजों को डोली के सहारे ढोने के लिए लोग भी नहीं मिल पाते हैं। ऐसे में मरीज की जान पर बन आती है। संवाद
कोट
शासन-प्रशासन को ग्रामीणों की कोई चिंता नहीं है। स्वास्थ्य व्यवस्थाएं गांव में होतीं तो शायद लोगों को इलाज के लिए बरम, पिथौरागढ़ नहीं जाना पड़ता। - पुष्कर सिंह बिष्ट, ग्राम पंचायत मेतली
भौगोलिक परिस्थिति को देखते हुए यहां पर स्वास्थ्य सुविधाएं बेहतर होनी चाहिए। शासन-प्रशासन में बैठे अधिकारियों को ग्रामीणों की इस गंभीर समस्या के बारे में सोचना चाहिए। - रूकमा देवी, पूर्व प्रधान, ग्राम पंचायत मेतली