गंगोलीहाट (पिथौरागढ़)। शिक्षकों की कमी और बजट न मिलने से राजीव गांधी नवोदय विद्यालय में बुनियादी सुविधाएं दम तोड़ रही हैं। हालत यह है कि 24 साल बाद भी छात्राओं के लिए अलग हॉस्टल नहीं बन पाया है जिसके कारण क्षमता से अधिक छात्र-छात्राएं एक ही छात्रावास को दो हिस्सों में बांटकर रहने को मजबूर हैं।
राज्य गठन के बाद वर्ष 2002 में जिले में शिक्षा व्यवस्था की बेहतरी के दावे के साथ गंगोलीहाट में राजीव गांधी नवोदय विद्यालय का संचालन शुरू हुआ। वर्ष 2012 तक विद्यालय जीआईसी के आवासीय भवन में संचालित हुआ तो वर्ष 2013 में इसे बमुश्किल अपना भवन मिला। यहां अब भी बजट की कमी से सिर्फ एक ही छात्रावास बन सका और जरूरत के बाद भी तीन का निर्माण अधर में लटका हुआ है।
विद्यालय में बनाए गए एकमात्र छात्रावास की क्षमता 120 विद्यार्थियों की है। वर्तमान में इसमें 160 से अधिक विद्यार्थी रह रहे हैं। हालात यह है कि डबल डेकर व्यवस्था के तहत विद्यार्थियों के रहने की व्यवस्था करनी पड़ी है। छात्रावास की कमी के चलते अभिभावक अपने पाल्यों का दाखिला नवोदय विद्यालय में कराने दूरी बना रहे हैं। नतीजतन यहां लगातार छात्रसंख्या घट रही है।
50 फीसदी बढ़ गई है निर्माण की लागत
वर्ष 2012 में उत्तर प्रदेश निर्माण निगम ने छात्रावासों के लिए 15.88 लाख रुपये का संशोधित प्रस्ताव शासन को भेजा लेकिन बजट नहीं मिला। वर्ष 2024 में पेयजल निगम को कार्यदायी संस्था बनाए जाने पर 13 करोड़ का आकलन तैयार कर शासन को भेजा गया जो फाइलों में सिमटकर रह गया है। समय पर बजट नहीं मिलने से निर्माण कार्य की लागत 50 फीसदी तक बढ़ गई है।
2024 तक यूपी निर्माण निगम संभालता रहा जिम्मेदारी
राज्य बनने के बाद भी 22 साल तक उत्तरप्रदेश निर्माण निगम ही गंगोलीहाट नवोदय विद्यालय की कार्यदायी संस्था बनी रही। वर्ष 2024 में यूपी निर्माण निगम से यह काम उत्तराखंड पेयजल निगम को दिया गया। पेयजल निगम ने भी आकलन तैयार कर अपनी जिम्मेदारी से पल्ला झाड़ लिया और अब तक शेष तीन छात्रावास नहीं बन पाए हैं।
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पेयजल निगम ने 13 करोड़ का आकलन तैयार कर शासन को भेजा था लेकिन दो साल से बजट नहीं मिला है। विद्यालय में चार छात्रावास बनने हैं। मांग के अनुरूप बजट न मिलने से छात्रावास का निर्माण नहीं हो सका है। -त्रिभुवन वर्मा, प्रभारी प्रधानाचार्य, राजीव गांधी नवोदय विद्यालय, गंगोलीहाट