बरार जल विद्युत परियोजना(फाइल)
- फोटो : PITHORAGARH
पिथौरागढ़। थल के बरार में बनी लघु जल विद्युत परियोजना में दो साल से विद्युत उत्पादन ठप है। बावजूद इसके ेपरियोजना को ठीक करने को लेकर कोई प्रयास नहीं किए जा रहे हैं। उरेडा ने लघु जल विद्युत परियोजना को ठीक कराने के लिए सरकार को करीब डेढ़ साल पहले ही प्रस्ताव भेजा था, इसके बाद भी ये प्रस्ताव सरकार की फाइलों में धूल फांक रहा है।
सीमांत जिले के थल में वर्ष 1995 में 750 किलोवाट की लघु जल विद्युत परियोजना का निर्माण किया गया। यहां 2018 तक विद्युत उत्पादन होता रहा, लेकिन दो साल से परियोजना में लगाई मशीनों के खराब होने और लघु जल विद्युत परियोजना के लिए बनाई गई नहर के जगह-जगह क्षतिग्रस्त होने से विद्युत उत्पादन नहीं होना है। उरेडा के परियोजना के सुधार का कार्य आईआईटी रुड़की की ओर से किया जाना है। इसके लिए करीब डेढ़ साल पूर्व 1.50 करोड़ रुपये का प्रस्ताव सरकार को भेजा गया लेकिन इस प्रस्ताव को आज तक स्वीकृति नहीं मिल पाई है। इस कारण परियोजना को ठीक नहीं किया गया है।
छोटी परियोजना की हो रही अनदेखी
पिथौरागढ़। एक ओर सरकार एशिया की सबसे बड़ी जल विद्युत परियोजना पंचेश्वर बांध को बनाने की तैयारी कर रही है। वहीं दूसरी ओर छोटी-बड़ी नदियों में पूर्व में बनाई गई लघु जल विद्युत परियोजनाओं की अनदेखी कर रही है, जिस कारण छोटी जल विद्युत परियोजनाओं को ठीक नहीं किया जा रहा है।
बरार लघु जल विद्युत परियोजना को ठीक करने के लिए 1.5 करोड़ रुपये का प्रस्ताव शासन को भेजा है। शासन से स्वीकृति मिलते ही परियोजना को ठीक करने का कार्य कर दिया जाएगा। -एके शर्मा, वरिष्ठ परियोजना अधिकारी उरेडा पिथौरागढ़।