प्रदेश सरकार की ओर से सेवा समाप्त करने के आदेश से शिक्षा प्रेरकों में आक्रोश फैल गया है। उन्होंने शिक्षा प्रेरकों के भविष्य के साथ खिलवाड़ का आरोप लगाते हुए प्रदर्शन किया। साथ ही दस फरवरी तक उनके भविष्य को लेकर कोई सकारात्मक फैसला नहीं होने पर उग्र आंदोलन और आत्मदाह जैसे कदम उठाने की चेतावनी दी।
बृहस्पतिवार को तहसील में प्रदर्शन के बाद उन्होंने एसडीएम अनिल चन्याल के माध्यम से मुख्यमंत्री को ज्ञापन भेजा। कहा कि ग्राम पंचायतों के लोकशिक्षा केंद्रों का संचालन कर निरक्षरों को साक्षर बनाने की जिम्मेदारी में शिक्षा प्रेरकों ने अहम भूमिका निभाई है।
वहीं बीएलओ, बाल गणना, प्रधानमंत्री जनधन योजना के खाते खुलवाने में भी शिक्षा प्रेरकों ने पूरी निष्ठा से कार्य किया, बावजूद इसके उनकी सेवाएं समाप्त कराना न्यायसंगत नहीं है। वहीं अप्रैल 2016 से अब तक 19 माह का मानदेय भी शिक्षा प्रेरकों को नहीं दिया गया है। ज्ञापन देने वालों में संजय चौड़ाकोटी, अर्चना लोहनी, पूनम देवी, हंसी देवी, कलावती नेगी, सरोज चंद, दुर्गा देवी, सुमन चंद आदि शामिल थे।