थल में सुलभ शौचालय की दीवारों पर पड़ी दरार
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थल में 1995 में सुलभ इंटरनेशनल की ओर से तैयार किया गया शौचालय अब खतरे से घिर गया है। इसके नजदीक की जमीन धंसने लगी है। शौचालय में दरारें पड़ने लगी हैं। सुलभ इंटरनेशनल कंपनी ने 13वें वित्त आयोग से मिली राशि से इस शौचालय का निर्माण तो किया, लेकिन इसकी देखरेख की कोई व्यवस्था नहीं की गई। शौचालय का ढांचा खड़ा करने के बाद कंपनी के लोग यहां से रवाना हो गए।
बाद में व्यापारियों ने एक सफाई कर्मचारी की अपने स्तर से नियुक्ति की और इसका संचालन शुरू करवाया। बताया गया कि 2013 में शौचालय की मरम्मत की गई, लेकिन उस समय यह ध्यान नहीं दिया गया कि शौचालय को कितना खतरा हो रहा है। ठीक स्टेशन के पास स्थित इस शौचालय का लाभ कई लोग उठाते हैं, लेकिन उसमें हो रहे खतरों की चिंता किसी को नहीं है।
लोगों का कहना है कि शौचालय को बनाते समय पक्की जमीन का चयन नहीं किया गया था। इस कारण अब उसके परिणाम सामने आने लगे हैं। स्थानीय लोगों का कहना है कि इस शौचालय की सही ढंग से मरम्मत की जाए और कस्बे के जो शौचालय क्षतिग्रस्त हुए हैं, उनकी मरम्मत की जाए।
शौचालय की शीघ्र मरम्मत की जाए
स्थानीय निवासी अशोक चंद का कहना है कि शासन जब किसी मद में धन खर्च करती है तो उनकी देखरेख की व्यवस्था भी करनी चाहिए। उनका कहना है कि शौचालय बनाने में लाखों रुपये खर्च किए गए, लेकिन उसके बाद उसे लावारिस छोड़ दिया। उन्होंने कहा कि स्टेशन के पास स्थित इस शौचालय की शीघ्र मरम्मत की जाए।
शौचालयों के निर्माण पर ज्यादा ध्यान दें
थल निवासी मनोज गोस्वामी का कहना है कि थल में रोजाना हजारों की संख्या में लोग आते हैं। उनकी सुविधा के लिए एक-दो शौचालय और बनाए जाने चाहिए। उन्होंने कहा कि सफाई के अभियान तभी कामयाब होंगे जब हर जगह शौचालय बन जाएं और लोगों की खुले में शौच की मजबूरी समाप्त हो जाए। उन्होंने कहा कि शौचालय निर्माण पर ज्यादा ध्यान दें।