डीडीहाट में बंद पड़ा एक्सरे कक्ष
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सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र में चिकित्सकों की कमी के चलते क्षेत्र के मरीजों का काफी दिक्कतें होती हैं। केंद्र को वर्ष 2002 में फर्स्ट रेफरल सेंट (एफआरयू) तो बना दिया गया, लेकिन सुविधाओं के अभाव में यहां से मरीज खुद ही अन्यत्र रेफर हो रहे हैं। वर्ष 2000 में अस्पताल में लगाई गई एक्सरे मशीन तकनीशियन के अभाव में धूल फांक रही है।
डीडीहाट और आसपास की करीब 15 हजार से अधिक आबादी सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र पर निर्भर है। अस्पताल में वर्तमान में सर्जन, आर्थोपैडिक, निश्चेतक, बाल रोग विशेषज्ञ, आंखों के चिकित्सक का पद रिक्त चल रहा है। चिकित्सकों की कमी को देखते हुए हाल ही में एक महिला चिकित्सक डॉ. नूतन जहीन की नियुक्ति की गई, लेकिन एक माह में ही यहां से उनका तबादला कर दिया गया। अस्पताल में रोजाना करीब सौ ओपीडी होती है। अमर उजाला संवाददाता ने शनिवार को सुबह पौने नौ बजे अस्पताल का जायजा लिया।
एनएचएम के तहत संविदा पर तैनात डॉ. बीएस महरा मरीजों का इलाज कर रहे थे। डॉ. सोनम साहनी प्रसव कराने में व्यस्त थीं। दंत चिकित्सक डॉ. राकेश रमन भी मरीजों के इलाज में व्यस्त थे। उन्होंने बताया कि दांतों के छह-सात मरीज रोजाना इलाज के लिए आते हैं। प्रभारी चिकित्साधिकारी अवकाश पर हैं। 30 बेड के अस्पताल में एक ही मरीज भर्ती था। अस्पताल में इस वित्तीय वर्ष से डायबिटीज की दवा इंसुलिन नहीं है। इसके चलते मरीजों को भटकना पड़ रहा है। डॉ. महरा ने बताया कि एक माह से डायरिया, पीलिया, टाइफाइड के मरीजों में इजाफा हो रहा है।