क्षतिग्रस्त भाटीगाड़ का पैदल पुल
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तहसील के दूनाकोट एवं देवीसूना क्षेत्र के दर्जनों गांवों को जोड़ने वाले के रास्ते और पैदल पुलिया टूटने से ग्रामीणों के सामने आवाजाही के साथ ही जरूरी सामान पहुंचाने का संकट पैदा हो गया है। डीडीहाट-दूनाकोट मार्ग पर जगह-जगह मलबा आने से अब भी वाहनों के संचालन में परेशानी हो रही है।
30 जून एवं एक जुलाई को हुई भारी बारिश और बादल फटने से दूनाकेाट क्षेत्र में भी भारी तबाही हुई। दूनाकोट के तीन मकान पूरी तरह से ढह गए। देवीसूना से लगे आधा दर्जन गांवों के सभी पैदल रास्ते एवं पुलिया टूटने से अब भी ग्रामीण और उनके मवेशी गांव में कैद हो गए हैं। इन गांव के युवा जान हथेली में रखकर टूटे रास्तों एवं नदी को पार करके किसी तरह से घर के लिए राशन और जरूरी सामान आदि की व्यवस्था कर रहे हैं। क्षेत्र के बीडीसी मेंबर महेश कन्याल ने बताया कि आपदा के 13 दिन बाद भी इन गांवों की किसी ने सुध नहीं ली है। ग्रामीण अपने जानवरों के लिए घास की व्यवस्था नहीं कर पा रहे हैं।
वहीं अंतोड़ा, कफलुवा, मौगड़ा, इजर सहित कई गांवों का संपर्क भाड़ीगाड़ नदी पर बने पुल के टूटने से बंद हो गया है। इन गांवों में राशन का भी संकट पैदा होने लगा है। लोगों के पैदल चलने के रास्ते पूरी तरह से टूट गए हैं। तहसीलदार पीसी पंत ने बताया कि दूनाकोट के तीन लोगों को मकान टूटने पर मुआवजा दे दिया गया है, जिन गांवों में पैदल रास्ते टूट गए हैं वहां रास्ते खुलवाने का काम शीघ्र कराया जाएगा।
थल के बटरौली गांव में कई मकानों को खतरा
थल (पिथौरागढ़)। थल तहसील के बड़ते सानीगांव ग्राम पंचायत के बटरौली गांव में कई मकान खतरे की जद में आ गए हैं। क्षेत्र में लगातार हो रही भारी बारिश से जगह-जगह भूकटाव हो रहा है। बटरौली में दीवान राम का मकान टूट गया है। उसने दूसरी जगह शरण ले रखी है। इसी गांव में गंगा देवी की गौशाला टूट गई है। सनेत गांव के राजेंद्र प्रसाद, प्रकाश कुमार के मकानों के पीछे की जमीन दरक रही है। प्रधान राजकमल ने गांव में हो रहे खतरे की जानकारी तहसीलदार को दी और तत्काल राहत राशि उपलब्ध कराने की मांग की है।