आदीचौरा बाजार के लिए वाहन में पानी भरकर ले जाते लोग
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आदीचौरा कस्बा एवं उससे सटे गांवों में पेयजल का गंभीर संकट शुरू हो गया है। कस्बे के लोग आठ किलोमीटर दूर से वाहनों में ढोकर पानी पहुंचा रहे हैं। आपदा के दौरान पेयजल लाइन टूटने से यह संकट खड़ा हुआ है। ग्रामीण अंचलों में लोग प्राकृतिक स्रोतों से प्यास बुझाने को मजबूर हैं।
आदीचौरा के सामाजिक कार्यकर्ता बलवंत सिंह मेहरा ने बताया कि जुलाई के अंतिम हफ्ते में आई भारी बारिश से आदीचौरा को जोड़ने वाली घनधूरा पेयजल योजना पूरी तरह नष्ट हो गई। इस योजना के 50 फीसदी पाइप मलबे में दब गए हैं। पेयजल योजना के क्षतिग्रस्त होने से आदीचौरा कस्बे के साथ-साथ हुमुकापीटा, हुनेरा, चुपड़ाखेत, काफलीगैर और सुनारखेत गांवों में पेयजल का गंभीर संकट खड़ा हो गया। आदीचौरा कस्बे के व्यापारी और वहां रहने वाले लोग डीडीहाट से निजी टैंकरों से पानी लाने को मजबूर हैं। बरसात के बंद होने के बाद से प्राकृतिक स्रोतों का जलस्तर कम हो गया है। इस कारण समस्या ज्यादा गंभीर होने लगी है।
लोगों ने विभाग से वैकल्पिक व्यवस्था कर पीने का पानी उपलब्ध कराने की मांग की है। दैवी आपदा से क्षतिग्रस्त इस पेयजल योजना की देखरेख का जिम्मा जल निगम के पास है। जल निगम के सहायक अभियंता शिवम द्विवेदी ने बताया कि योजना आपदा के कारण काफी क्षतिग्रस्त हो गई है। इसकी मरम्मत का प्रस्ताव बनाया गया है। अभी शासन से मरम्मत के लिए धन नहीं मिला है।