नाचनी के प्राथमिक विद्यालय में संचालित आंगनबाड़ी केंद्र। संवाद
पिथौरागढ़। प्रदेश में 3940 आंगनबाड़ी केंद्रों के निर्माण के लिए राज्य सरकार ने केंद्र सरकार को प्रस्ताव भेजा है। जिले में 320 आंगनबाड़ी भवन बनाए जाने का लक्ष्य मिला है। ये कब बनेंगे पता नहीं मगर मौजूदा समय में आंगनबाड़ी केंद्रों पर भविष्य की बुनियाद को संसाधनों के अभाव में मजबूत करने की कोशिश की जा रही है। जिले में 59 आंगनबाड़ी केंद्र किराये के भवन में चल रहे हैं। 557 केंद्र प्राथमिक विद्यालयों में सचांलित हो रहे हैं।
जिले के आठ विकासखंडों में 1111 आंगनबाड़ी केंद्र हैं। 342 आंगनबाड़ी केंद्र ऐसे हैं जो विभागीय भवन में संचालित हो रहे हैं। 62 आंगनबाड़ी केंद्र पंचायत घर और 91 अन्य सरकारी भवनों में चल रहे हैं। इन केंद्रों में पढ़ने वाले एक से तीन और तीन से छह आयु वर्ग के बालक-बालिकाओं की संख्या 20429 है।
किराये के भवनों के केंद्र
धारचूला 3230
गंगोलीहाट 3847
मुनस्यारी में 2156
विण 3956
बेड़ीनाग में 2134
कनालीछीना 1805
मूनाकोट में 1750
डीडीहाट में 1551
इनसेट
जिले में 320 आंगनबाड़ी भवन बनाए जाने का लक्ष्य मिला है। भवन निर्माण के लिए आठ लाख मनरेगा और चार लाख रुपया बाल विकास विभाग से मिला है।
- डॉ. निर्मल बसेड़ा, बाल विकास परियोजना अधिकारी, विण पिथौरागढ़।
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चंपावत में 150 केंद्रों का अपना भवन नहीं
चंपावत। जिले में 150 आंगनबाड़ी केंद्र किराये और पंचायत भवनों में चल रहे हैं। जिले में कुल 641 आंगनबाड़ी केंद्रों में 9054 बच्चे पंजीकृत हैं। जिन्हें महिला सशक्तीकरण और बाल विकास विभाग की ओर से टीकाकरण, टेक होम राशन सुविधा का लाभ मुहैया कराया जा रहा है।
इसके अलावा आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं की ओर से बच्चों और गर्भवतियों की देखभाल के साथ ही निर्वाचन संबंधी कार्य किए जाते हैं। जिला कार्यक्रम अधिकारी राजेंद्र प्रसाद बिष्ट ने बताया कि वर्तमान में जिले में आंगनबाड़ी कार्यकर्ताओं और सहायिकाओं के 51 पद रिक्त हैं। दो स्थानों पर बिना कार्यकर्ता और सहायिकाओं के आंगनबाड़ी केंद्रों का संचालन किया जा रहा है। संवाद