साहित्यकार सर्वेश्वर दयाल सक्सेना लिखित ‘लाख की नाक’ नाटक का रविवार को यहां राजकीय संग्रहालय में मंचन किया गया। केंद्रीय संस्कृति मंत्रालय के सहयोग से मंचित नाटक के माध्यम से भ्रष्टाचार पर करारी चोट मारने का प्रयास किया गया। निर्देशक मनोज लीला भट्ट ने नाटक में भ्रष्टाचार के लगातार फैलते मकड़जाल और उससे होने वाले नुकसानों पर नाटक के माध्यम से रोशनी डालने की कोशिश की। नाटक में यह दिखाने की कोशिश की गई कि आखिरकार भ्रष्टाचार का जरूर अंत होगा। जब कोई चीज पराकाष्ठा तक पहुंचती है तो उसके निदान के रास्ते भी निकल आते हैं।
मुख्य अतिथि सहकारिता परिषद के उपाध्यक्ष महेंद्र सिंह लुंठी ने कहा कि नाटकों का मंचन समाज को नई दिशा देता है। पिथौरागढ़ में नाटकों के मंचन की परंपरा फिर से शुरू होने को उन्होंने बेहतर प्रयास बताते हुए कहा कि आगे भी इसे जारी रखा जाए। उन्होंने भ्रष्टाचार पर चोट करने वाले नाटक की सराहना की। निर्देशक मनोज लीला भट्ट और सह निर्देशक कैलाश कुमार ने कहा कि नाटक में सर्वेश्वर दयाल की मूल रचना के तथ्यों के साथ कोई छेड़छाड़ नहीं की गई है। कोशिश की गई है कि जनता तक अच्छा संदेश जाए। हर कलाकार ने नाटक में अभिनय को बेहतरीन ढंग से किया।