दिल्ली में धनवंतरि पुरस्कार लेते करते डॉ. जोशी।
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पिथौरागढ़। कविवर लोकरत्न पंत गुमानी की भूमि गंगोली (गंगोलीहाट) निवासी प्रतिष्ठित आयुर्वेदाचार्य डॉ. नवीन जोशी (एमडी आयुर्वेद) को आयुर्वेद के क्षेत्र में उल्लेखनीय कार्य के लिए धन्वंतरि पुरस्कार से सम्मानित किया गया है।
उत्तराखंड आयुर्वेद विवि देहरादून में कार्यरत डॉ. जोशी को 10 अगस्त को दिल्ली के इंडिया इंटरनेशनल सेंटर में चल रहे ओज फेस्टिवल 2019 में वरिष्ठ पत्रकार राहुल देव और हरियाणा की आयुष निदेशक वैद्य देवेंद्र त्रिगुणा ने आयुर्वेद के प्रतिष्ठित पुरस्कार धन्वंतरि से सम्मानित किया। करीब 20 वर्षों से आयुर्वेद के क्षेत्र में सेवाएं दे रहे डॉ. नवीन जोशी ने 2010 में सीमांत जिले के पिथौरागढ़ और कुमाऊं क्षेत्र में मौजूद दुर्लभ जड़ी-बूटियों की पहचान कर इसके संरक्षण के प्रति लोगों को जागरूक किया। उन्होंने 200 से अधिक औषधीय पौधों की लाइव डॉक्यूमेंट्री यू ट्यूब पर अपलोड की, जिसे पूरी दुनिया में हजारों लोगों ने सब्सक्राइब किया। 2010 से 2014 तक आयुष दर्पण पत्रिका को प्रकाशित किया और 2014 के बाद पत्रिका को हेल्थ पोर्टल में बदल दिया। डॉ. जोशी मूल रूप से गंगोलीहाट के एक छोटे से गांव चहज निवासी डॉ. विशन दत्त जोशी और मां सुषमा जोशी के सुपुत्र हैं। पत्नी मुग्धा जोशी प्रयोगशाला प्राविधिक एवं दूरदर्शन देहरादून की केजुअल संचालिका हैं। डॉ. जोशी के भाई डॉ. रमेश चंद्र जोशी एनेस्थेटिस्ट हैं।
पिता के संघर्षों से मिला मुकाम
डॉ. नवीन जोशी बताते हैं कि पिता के संघर्षों के कारण ही वह आज यहां तक पहुंचे हैं। बताते हैं कि पिता के समय में चहज गांव में बिजली नहीं थी। पिता ने चीड़ के छिलके के उजाले से पढ़ाई की और कक्षा 8 की पढ़ाई के लिए अल्मोड़ा निकल पड़े। रामेश्वर की उफनती नदी को पार कर अल्मोड़ा जाते थे। तभी हम लोग यहां पहुंचे हैं। डॉ. जोशी के पिता ऐलोपैथिक चिकित्सक के पद से सेवानिवृत्त हुए हैं।