भारत और नेपाल के बीच महाकाली में प्रस्तावित बहुआयामी पंचेश्वर बांध परियोजना की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (डीपीआर) अक्तूबर तक तैयार हो जाएगी।
डीपीआर बनाने का काम वेबकोस कंपनी को मिला है। केंद्रीय जल आयोग (सीडब्लूसी) परियोजना का काम जल्दी शुरू कराने के लिए प्रयास कर रहा है।
डीपीआर बनाने वाली कंपनी ने प्रस्तावित स्थल की जमीन की स्थिति जानने के लिए जगह जगह खुदाई काम शुरू कर दिया है। ड्रीलिंग के जरिए यह जानकारी हासिल की जाएगी कि चट्टान बांध को सहन कर पाने की स्थिति में हैं या नहीं।
पंचेश्वर डेवलपमेंट अथारिटी लगातार काम की प्रगति पर नजर रख रहा है। डीपीआर बनाने वाली कंपनी ने अपना प्रोजेक्ट आफिस महेंद्रनगर नेपाल में स्थापित कर दिया है।
जबकि पंचेश्वर और रूपालीगाड़ में अलग से आफिस खोल दिए हैं। केंद्रीय जल आयोग के अधिशासी अभियंता विशाल गर्ग के नेतृत्व में एक टीम ने ठुलीगाड़, पंचेश्वर, पूर्णागिरी, तामली, रामेश्वर का निरीक्षण किया।
डीपीआर में बांध की लंबाई, चौड़ाई, ऊंचाई, आवासीय भवन, डूब क्षेत्र, डूब क्षेत्र में आने वाले भवनों की स्थिति, जमीन, गांव, बांध का एरिया, विस्तारीकरण और विस्थापन को शामिल किया जाएगा।
बताया गया है कि डीपीआर पेश हो जाने के बाद दोनों देशों के लोगों से आपत्ति मांगी जाएगी। इनके निस्तारण के बाद काम शुरू किया जाएगा। लोगों की राय के आधार पर परियोजना में आंशिक बदलाव भी किए जाएंगे।
इस समय पंचेश्वर बांध परियोजना से 6480 मेगावाट बिजली उत्पादन का लक्ष्य रखा गया है लेकिन डीपीआर पेश होने के बाद इसमें थोड़ा परिवर्तन हो सकता है।