पिथौरागढ़। सीमांत जिले के जिला अस्पताल में हंस फाउंडेशन के सहयोग से स्थापित आईसीयू (इंटेंसिव केयर यूनिट) विशेषज्ञ चिकित्सकों के अभाव में सात वर्ष बाद भी पूरी तरह संचालित नहीं हो सका है। हाल ही में शासन की ओर से आईसीयू के लिए नियुक्त किए गए दो विशेषज्ञ चिकित्सकों ने भी पिथौरागढ़ में कार्यभार ग्रहण नहीं किया जिससे आईसीयू के नियमित संचालन की उम्मीदों को फिर झटका लगा है।
गंभीर मरीजों को बेहतर उपचार उपलब्ध कराने के उद्देश्य से वर्ष 2019 में हंस फाउंडेशन के सहयोग से करीब 2.5 करोड़ रुपये की लागत से जिला अस्पताल में आईसीयू स्थापित किया गया था। इसके लिए आधुनिक मशीनें भी उपलब्ध कराई गईं। आईसीयू के संचालन के लिए एनेस्थेटिस्ट (बेहोशी विशेषज्ञ), फिजिशियन सहित कुल 24 स्वास्थ्य कर्मियों की आवश्यकता है। हालांकि सात वर्षों में केवल नौ स्टाफ नर्सों की ही तैनाती हो सकी है जबकि एक भी विशेषज्ञ चिकित्सक की नियमित नियुक्ति नहीं हो पाई।
हाल ही में शासन ने आईसीयू के लिए पहली बार डॉ. अमरजीत और डॉ. संदीप सिंह पांगती की नियुक्ति के आदेश जारी किए थे लेकिन दोनों चिकित्सकों ने पिथौरागढ़ में कार्यभार ग्रहण नहीं किया। दोनों ने बाद में सुगम जिलों नैनीताल और ऊधमसिंह नगर में तैनाती ले ली। ऐसे में जिला अस्पताल में आईसीयू के पूर्ण संचालन की उम्मीदों को एक बार फिर झटका लगा है।
गंभीर मरीजों को करना पड़ता है रेफर
सीमांत और दुर्गम जिले में सड़क दुर्घटनाओं और गंभीर बीमारियों के मामले लगातार सामने आते रहते हैं। आईसीयू विशेषज्ञों की कमी के कारण अस्पताल प्रशासन को गंभीर मरीजों को हायर सेंटर रेफर करना पड़ता है। कई बार मरीजों की हालत रास्ते में ही बिगड़ जाती है जिससे उनकी जान पर भी बन आती है।
बीते दिनों जिले में नए डॉक्टरों की नियुक्ति के आदेश जारी हुए थे। कुछ चिकित्सकों ने तैनाती नहीं ली है। चिकित्सकों की कमी को दूर करने के हरसंभव प्रयास किए जा रहे हैं। जिला अस्पताल में अन्य चिकित्सक आईसीयू का संचालन कर जरूरमंद मरीजों को स्वास्थ्य सुविधाएं उपलब्ध करा रहे हैं। -डॉ. जेएस चुफाल, सीएमओ, पिथौरागढ़
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