चंपावत। भारत सरकार की एक विशेषज्ञ टीम ने जिला अस्पताल में ब्लड कंपोनेंट सेपरेशन यूनिट (बीसीएसयू) के लाइसेंस के लिए निरीक्षण किया। टीम ने ब्लड बैंक की आधारभूत सुविधाओं और कार्यप्रणाली का परीक्षण किया।
संचालन टीम ने निरीक्षण के दौरान आवश्यक उपकरणों, गुणवत्ता मानकों और लाइसेंस प्रक्रिया से जुड़े महत्वपूर्ण बिंदुओं की जांच की। डीएम मनीष कुमार ने विशेषज्ञ टीम के अधिकारियों से जिले में बेहतर रक्त सेवाओं की आवश्यकता पर बात की। उन्होंने प्रक्रिया को निर्धारित मानकों के अनुरूप आगे बढ़ाने के निर्देश दिए।
सीएमओ देवेश चौहान ने बताया कि निरीक्षण के बाद आवश्यक अग्रिम कार्रवाई की जा रही है। जिला अस्पताल में पहले से ही पूरे रक्त की सुविधा उपलब्ध है। इससे औसतन हर महीने करीब 50 मरीजों को लाभ मिलता है। यह सुविधा लोहाघाट और टनकपुर के उपजिला अस्पतालों में भी है। अस्पताल प्रबंधन के अनुसार, यूनिट के लिए अनुभवी पैथोलॉजिस्ट मौजूद हैं। जरूरत पड़ने पर स्थानीय स्तर पर प्रशिक्षण की भी तैयारी है। निरीक्षण टीम में नरेश कुमार गोली, नीरज कुमार और हर्षिता शामिल थे।
आरबीसी, प्लाज्मा, प्लेटलेट्स निकालना होगा आसान
चंपावत। ब्लड कंपोनेंट यूनिट में एक यूनिट करीब 450 मिलीलीटर में मशीन की मदद से लाल रक्त कोशिकाएं (आरबीसी), प्लाज्मा और प्लेटलेट्स जैसे घटक अलग किए जाएंगे। इससे रक्त की बचत भी होगी। आरबीसी ऑक्सीजन की कमी (एनीमिया) और सर्जरी के दौरान खून की भारी कमी को पूरा करने के लिए किया जाएगा। प्लेटलेट्स डेंगू या कैंसर आदि बीमारियों और प्लेटलेट्स रक्तस्राव को रोकने वाले थक्के और प्रोटीन प्रदान करने के लिए उपयोग किए जाएंगे।