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मरम्मत में 50 लाख खर्च पर पानी नहीं चला

Wed, 04 Jan 2017 10:50 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, थल
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लंबे समय से सूखी पड़ी पतेत नहर - फोटो : अमर उजाला
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चंद्रभागा से पतेत गांव के लिए बनी पांच किलोमीटर लंबी नहर की मरम्मत में सिंचाई विभाग ने पिछले साल 50 लाख रुपए खर्च तो किए, लेकिन खेतों में पानी तब भी नहीं पहुंचा। आश्चर्यजनक बात यह है कि सिंचाई विभाग के रिकार्ड में यह नहर चालू हालत में दिखाई गई है और बाकायदा इसका टैक्स भी किसानों से वसूला जाता है।
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पतेत की उपजाऊ जमीन तक पानी पहुंचाने के लिए 1962 में इस नहर का निर्माण किया गया था। शुरुआत में नहर से बराबर पानी चलता रहा और फसलों का उत्पादन भी बढ़ता गया, लेकिन पांच साल से नहर जगह-जगह टूटने लगी और खेतों में पानी पहुंचना बंद हो गया। गांव के लोग जब तक खेतों में पानी पहुंचता था, तब तक मुख्य फसल के साथ सब्जी का उत्पादन भी करते थे, लेकिन जब से नहर बंद हुई तब से फसल का उत्पादन तो प्रभावित हुआ ही है साथ में सब्जी की पैदावार भी कम हो गई है। गांव के लोग बताते हैं कि सिंचाई विभाग ने पिछले वर्ष नहर के मात्र तीन किलोमीटर हिस्से की मरम्मत की और शेष दो किलोमीटर हिस्से को छोड़ दिया।

सिंचाई विभाग के अभियंता एलएम उप्रेती का कहना है कि 50 लाख रुपए की राशि तीन किलोमीटर नहर की मरम्मत में खर्च हो गई। उसके बाद शासन से पैसा नहीं मिला। वह कहते हैं कि नहर की मरम्मत के लिए आपदा मद से भी धन की मांग की गई है। पैसा मिलने पर मरम्मत की जाएगी। नहर में पानी न चलने के कारण इस बार किसान गेहूं की बुआई भी सही ढंग से नहीं कर पाए। सरकारी लापरवाही को लेकर लोगों में भारी गुस्सा है।
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घपले की जांच होनी चाहिए
पतेत निवासी सुरेश चंद का कहना है कि नहर की मरम्मत में हुए धन के खर्च की जांच होनी चाहिए। उन्होंने कहा कि जितनी राशि मरम्मत में खर्च की थी उतने में तो नई नहर का निर्माण हो जाता। सिंचाई विभाग के किसी बड़े अधिकारी ने मरम्मत के काम का निरीक्षण तक नहीं किया। सरकारी लापरवाही का खामियाजा किसानों को भोगना पड़ रहा है।

दूसरी योजना भी नहीं बन पा रही
पतेत निवासी जानकी देवी का कहना है कि विभाग ने वर्तमान नहर को चालू हालत में दिखा रखा है, इस कारण नई योजना की मंजूरी नहीं मिल पा रही है। उन्होंने कहा कि वर्तमान नहर को नाकाम घोषित कर देना चाहिए और तत्काल नई नहर का निर्माण होना चाहिए। इस नहर की मरम्मत में अब धन खर्च करने की जरूरत नहीं है।
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