झूलाघाट-पिथौरागढ़ रोड पर इस तरह निकली हैं सरिया
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नेपाल सीमा को जोड़ने वाली झूलाघाट-पिथौरागढ़ सड़क बदहाल हो चुकी है। सड़क पर बने गड्ढे और पैराफिट टूटने के बाद निकली सरिया किसी बड़े हादसे का इंतजार कर रही हैं। लोक निर्माण विभाग और उनके मजदूर कभी भी सड़क पर काम करते नहीं दिखाई देते। इस कारण सड़क के दोनों ओर बनी नालियां बंद पड़ी हैं और दोनों तरफ उग आई झाड़ियों ने सड़क की चौड़ाई को कम कर दिया है।
पड़ोसी देश नेपाल और मूनाकोट के दर्जनों गांवों को जोड़ने वाली झूलाघाट-पिथौरागढ़ सड़क के चौड़ीकरण का काम शुरुआत में एशियन डेवलेपमेंट बैंक के कंस्ट्रक्शन डिवीजन के माध्यम से किया गया। मानकों के हिसाब से काम न होने और अधूरा काम करने के कारण मुख्यमंत्री हरीश रावत ने सड़क निर्माण के जांच के आदेश दिए थे। कुछ समय बाद यह सड़क लोक निर्माण विभाग को हस्तांतरित हो गई। लोनिवि ने सड़क की देखरेख के लिए मजदूरों की एक गैंग तैनात कर दी थी, परंतु गैंग के लेबर कभी भी इस सड़क पर काम करते नहीं दिखाई देते। इस कारण सड़क की और ज्यादा दुर्दशा हो गई। इस सड़क पर सैकड़ों गाड़ियां एवं पड़ोसी देश नेपाल के बैतड़ी, दार्चुला, डडेलधूरा, बजांग, बाजुरा जिले के अधिकारी और यात्री गुजरते हैं।
लोनिवि के सहायक अभियंता दिनेश गिरिराज ने बताया कि विभाग प्रति 10 किलोमीटर पर मजदूरों का एक गैंग रखता है। इसमें 12 लोग होते हैं। झूलाघाट सड़क की लंबाई 36 किमी है। मानकों के हिसाब से मजदूरों की 4 गैंग होनी चाहिए, लेकिन स्टाफ की कमी की वजह से सड़क पर एक ही गैंग काम कर रही है। मजदूरों द्वारा सड़क में काम न करने की सूचना मिली है। सड़क का निरीक्षण कर इसे देखा जाएगा। अगर मजदूर काम करते नहीं दिखाई दिए तो उनके खिलाफ कार्रवाई की जाएगी।
सड़क की मरम्मत का काम करने वाले स्थायी मजदूरों का वेतन 20 हजार रुपए प्रतिमाह तक होता है और संविदा पर काम करने वाले मजदूरों का वेतन भी कम से कम दस हजार रुपए होता है। इतने ज्यादा वेतन के बाद भी मजदूर सड़क की मरम्मत का काम नहीं करते। इस समय हालत यह है कि पिथौरागढ़ से झूलाघाट तक कम से कम पांच स्थानों पर सड़क पर निकली सरिया वाहन चालकों के लिए भारी मुसीबत पैदा कर रही है।