रई झील के संबंध में अफसरों की बैठक लेते डीएम डा. रंजीत सिन्हा
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15 वर्षों से प्रस्तावित रई झील के निर्माण की कवायद प्रशासन ने फिर शुरू कर दी है। बृहस्पतिवार को कलक्ट्रेट में जिलाधिकारी डा. रंजीत सिन्हा ने सेना, आईटीबीपी, रक्षा कृषि जैव प्रयोगशाला, सिंचाई विभाग और पेयजल निगम के अधिकारियों की बैठक में कहा कि पिथौरागढ़ नगर के पेयजल संकट के निदान के लिए रई झील का निर्माण बेहद जरूरी है। जिस स्तर से भी झील के निर्माण में आपत्ति की जा रही हैं उनका हल निकाला जाएगा।
डीएम ने कहा कि नगर के पेयजल व्यवस्था के लिए अगले 50 वर्ष का प्लान तैयार करने की जरूरत है। निर्माणाधीन आंवलाघाट पेयजल योजना के साथ-साथ रई झील का पानी भी पेयजल के उपयोग में लाया जाएगा। उन्होंने कहा कि ऐसी स्थिति में रई झील के निर्माण में आ रही बाधाओं को दूर करने की जरूरत है। बैठक में यह जानकारी में आया कि रक्षा कृषि जैव प्रयोगशाला ने रई झील के निर्माण में आपत्ति लगा दी थी। क्योंकि प्रस्तावित रई झील का विस्तार प्रयोगशाला के नजदीक तक हो रहा है। डीएम ने कहा कि झील के निर्माण में सेना को सहयोग देना होगा।
बैठक में कहा गया कि रई नाले में कई मकानों की गंदगी फेंकी जा रही है। इससे यह नाला प्रदूषित हो रहा है। डीएम ने कहा कि जिस घर का गंदा पानी रई नाले में गिरता पाया जाएगा, उसके खिलाफ सख्त कार्रवाई की जाएगी। बैठक में सीडीओ आशीष चौहान, रक्षा कृषि जैव प्रयोगशाला के निदेशक कर्नल एस भल्ला, डा. पीएस नेगी, सेना के गैरीसन इंजीनियर एस सिंह, सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता पीके दीक्षित, अधिशासी अभियंता पीएस बिष्ट, पेयजल निगम के ईई आरएस धर्मशक्तू, जल संस्थान के ईई आरके वर्मा, आईटीबीपी के उपसेनानी केएस रावत, सुनील बसेड़ा आदि उपस्थित थे।
रई में 750 मीटर लंबी झील का प्रस्ताव
रई झील का प्रस्ताव सिंचाई विभाग ने तैयार किया है। सिंचाई विभाग के अधीक्षण अभियंता पीके दीक्षित ने बताया कि रई में 750 मीटर लंबी, 100 मीटर चौड़ी और 13 मीटर गहराई वाली कृत्रिम झील बनेगी। झील का यह प्रस्ताव काफी पहले तैयार कर लिया गया था। रक्षा कृषि जैव अनुसंधानशाला ने अपने परिसर से 25 मीटर दूरी पर झील बनाने को कहा है। इसे लेकर पहले आपत्ति भी दर्ज की गई। प्रस्तावित झील के पास ही अनुसंधानशाला की जमीन और परिसर है।