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मरीजों के बोझ से कराह रहा जिला अस्पताल

Fri, 06 Apr 2018 10:30 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
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पिथौरागढ़ जिला अस्पताल के बरामदे में भर्ती मरीज - फोटो : अमर उजाला
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जिले के प्रमुख सरकारी अस्पताल में स्वास्थ्य सेवाएं पटरी से उतर चुकी हैं। चिकित्सकों और संसाधनों की कमी के बीच जिला अस्पताल मरीजों के बोझ से कराह रहा है। हालात यह हैं कि अस्पताल में मरीजों की लंबी लाइनें लगी हैं। अस्पताल की गैलरी और बरामदे में मरीजों का इलाज करना पड़ रहा है।

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120 बेड के जिला अस्पताल में पिथौरागढ़ ही नहीं बल्कि बागेश्वर, चंपावत के साथ ही नेपाल के लोग भी इलाज के लिए आते हैं। जिला अस्पताल में रोजाना सात सौ नए मरीजों की ओपीडी होती है, जबकि तीन सौ नियमित रोगी जांच और दवा के लिए आते हैं। इस तरह रोजाना अस्पताल में एक हजार मरीजों की आमद होती है। यहां एक हजार मरीजों पर 21 चिकित्सकों की तैनाती है, जबकि चिकित्सकों के छह पद रिक्त चल रहे हैं। सिस्टर, नर्स से लेकर फार्मेसिस्ट, टेक्नीशियन के 19 पद खाली हैं। दबाव के चलते मरीजों को इलाज के लिए लंबा इंतजार करना पड़ रहा है। 

कई मरीज तो अस्पताल से बैरंग तक लौट जाते हैं। मरीजों के दबाव को देखते हुए जिला अस्पताल में 50 बेड के विस्तारीकरण की योजना बनाई गई थी, लेकिन बजट न मिलने से योजना अटकी है। अस्पताल में आधुनिक उपकरणों के साथ कई जांचों की सुविधा है। दवाओं की भी कोई कमी नहीं है, लेकिन स्टाफ एवं बेड के अभाव में लोगों को इसका पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा।
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ट्रामा सेंटर और आईसीयू को भी नहीं मिला बजट
जिला अस्पताल में ट्रामा सेंटर और आईसीयू के निर्माण की योजना भी बजट न मिलने से अटकी है। अस्पताल के विस्तारीकरण के साथ ही ट्रामा सेंटर, आईसीयू भी बनाया जाना था। इसके लिए 5.68 करोड़ की योजना तैयारी की गई थी। इसकी डीपीआर शासन की मेज पर धूल फांक रही है।

एक साल में 1661 मरीज रेफर 
चिकित्सकों की कमी, ट्रामा सेंटर, आईसीयू समेत कई जरूरी संसाधनों के अभाव में जिला अस्पताल रेफरल सेंटर बनकर रह गया है। मामूली रोगों के अलावा अस्पताल में इलाज नहीं मिल पा रहा है। गंभीर केस में जोखिम के डर से चिकित्सक मरीज को हाथ नहीं लगाते। उन्हें रेफर कर दिया जाता है। जिला अस्पताल से साल भर में 1661 मरीजों को रेफर किया गया।

बजट न मिलने से अस्पताल के विस्तारीकरण की योजना शुरू नहीं हो पाई है। मरीजों के दबाव के चलते बेड नाकाफी हैं। मजबूरन अस्पताल के बरामदे में मरीजों को भर्ती करना पड़ रहा है। रिक्त चिकित्सक एवं अन्य स्टाफ के पदों पर नियुक्ति के लिए शासन को मांग भेजी गई है। -डॉ. जीएस खड़ायत, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक, जिला अस्पताल

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