कनालीछीना के लोग पेयजल के लिए तरस रहे हैं। यहां बनी एकमात्र पेयजल योजना से पानी की आपूर्ति नहीं हो पा रही है। योजना के स्रोत में गिरावट आने से यह नौबत आई है। वहीं, पेयजल संकट से जूझ रहे लोगों का अधिकतर समय नौलों और गधेरों से पानी लाने में ही खर्च हो रहा है। हाल इस कदर खराब हैं कि दुकानदार पानी ढुलान के लिए मजदूरों का सहारा ले रहे हैं। कई इलाकों में तो पानी खरीदना पड़ रहा है।
कनालीछीना के लोगों की प्यास बुझाने के लिए दो दशक पहले जोगानी गाड़ कनालीछीना पेयजल योजना बनाई गई। इस योजना से जोस्यूड़ा, मल्ली कनालीछीना और बाजार क्षेत्र को पानी की आपूर्ति की जाती है। यहां 21 परिवारों ने पानी के कनेक्शन लिए हैं, लेकिन अब इस पेयजल योजना के स्रोत में गिरावट आ गई है। जो कनालीछीना की करीब पांच सौ की आबादी की प्यास बुझाने में नाकाम साबित हो रही है।
यहां के दुकानदार मजदूरों के जरिए दस रुपये प्रति कनस्तर पानी की व्यवस्था कर रहे हैं। इससे उन्हें अनावश्यक धन खर्च करना पड़ रहा है, जबकि बाकी लोग नौले और गधेरों से पानी भर रहे हैं। व्यापार संघ अध्यक्ष दीपक भंडारी, मन्नू भंडारी, मनोहर सिरोला, बबलू पंत, कमान सिंह, दीपक सिरोला आदि ने अधिशासी अभियंता को पत्र लिखकर पेयजल संकट से शीघ्र निजात दिलाने की मांग की है।
15 से वाहन से बांटा जाएगा पानी
कनालीछीना में पेयजल संकट को देखते हुए अब वाहन के जरिए पानी की आपूर्ति की जाएगी। विभाग के कनिष्ठ अभियंता कमल भट्ट का कहना है कि पेयजल योजना के स्रोत में पानी का स्तर गिर गया है। समस्या से निजात दिलाने के लिए 15 अप्रैल से पिकअप वाहन के जरिए पेयजल आपूर्ति की जाएगी।
जरूरत से कम मिल रहा है पानी
कनालीछीना में जरूरत से बेहद कम पानी की आपूर्ति हो रही है। कनालीछीना में इस वक्त प्रतिदिन 35 हजार लीटर पानी की जरूरत है, लेकिन पेयजल स्रोत में गिरावट आने से मांग के सापेक्ष केवल 20 हजार लीटर पानी प्रतिदिन उपलब्ध हो पा रहा है।