ठुलीगाड़ पेयजल योजना में सीवरेज मिलने का मामला अभी ठंडा भी नहीं हुआ था कि घरों में गंदे पानी की दोबारा आपूर्ति शुरू हो गई है। पानी इस कदर गंदा है कि फिल्टर तक जवाब दे गए हैं। इससे पेयजल आपूर्ति की गुणवत्ता को लेकर फिर सवाल उठने लगे हैं।
शनिवार को लगातार दूसरे दिन सिमलगैर, चिमिस्यानौला, नगर पालिका क्षेत्र, लिंक रोड, टकाना, जीआईसी रोड, लिंठ्यूड़ा, दौला आदि इलाकों के घरों से गंदा पानी आने की शिकायतें मिली। पानी का रंग काफी मटमैला है और दुर्गंध भी आ रही है। गंदे पानी की आपूर्ति से क्षेत्रवासियों में रोष है। बता दें कि 9 फरवरी को ठुलीगाड़ में सैन्य अस्पताल का सीवर पकड़ा गया था। इससे पहले जल संस्थान पेयजल योजना में सीवरेज मिलने से बेखबर था।
लगातार गंदा पानी मिलने की शिकायतें सामने आने के बाद जल संस्थान ने पानी के स्रोत की रेकी की तो इसका खुलासा हुआ। इधर, नलों में फिर से गंदा पानी आने के बाद लोग दोबारा आशंकित हो गए हैं। प्रभावित क्षेत्रों के लोगों को घरों के नल बंद कर नौले की शरण लेनी पड़ी। वहीं, लोगों में जल संस्थान के खिलाफ नाराजगी है।
गंदे पानी का नमूना लेकर अमर उजाला पहुंचे लोग
शनिवार को दौला क्षेत्र में गंदे पानी की आपूर्ति हुई। इससे भड़के लोगों ने जल संस्थान पर आपूर्ति में लापरवाही का आरोप लगाया। दौला इलाके के लोग गंदे पानी का नमूना लेकर अमर उजाला कार्यालय पहुंचे। दौला निवासी सुरेश जोशी ने बताया कि दिनभर इलाके के घरों में गंदा पानी आया। शिकायत करने के लिए जल संस्थान के कार्यालय के साथ ही जेई को फोन मिलाया गया, लेकिन कॉल रिसीव नहीं हुई। क्षेत्रवासियों ने पेयजल आपूर्ति में प्रदूषण की आशंका जताई और नमूनों की जांच की मांग उठाई है।
जल संस्थान ने ट्रायल का हवाला देकर पल्ला झाड़ा
कई इलाकों में गंदा पानी आने की शिकायतें सामने आने के बाद जल संस्थान आंवलाघाट योजना ट्रायल का हवाला देकर पल्ला झाड़ने की कोशिश कर रहा है। ईई विशाल सक्सेना का कहना है कि इन दिनों नवनिर्मित आंवलाघाट योजना का ट्रायल चल रहा है। इसके तहत नए टैंकों में पानी भरा जा रहा है। टैंकों के जरिये लाइनों में आपूर्ति की जा रही है। उन्होंने नवनिर्मित टैंकों की मिट्टी पानी में मिलने की आशंका जताई है। उन्होंने किसी पुराने टैंक की भीतरी दीवार दरकने की भी आशंका जताई। ईई का कहना है कि शिकायतों की जांच कराई जा रही है।