थल के रामगंगा घाट पर गंदगी का अंबार है। न तो घाट की सफाई होती है और न गंदगी फैलाने वालों में कभी कोई कमी आती है। यह सिलसिला वर्षों से चला आ रहा है। सुधार के बजाय घाट की दशा लगातार खराब हो रही है।
रामगंगा के इस घाट पर शवों को अंतिम संस्कार के लिए लाया जाता है। शवों को जलाने के बाद लोग अधजली लकड़ियों को घाट पर ही छोड़ देते हैं। कपड़ों के टुकड़ों और राख को भी उसी हालत में छोड़कर लोग चले जाते हैं। रामगंगा के इस पानी का उपयोग लोग स्नान और पीने के लिए करते हैं, लेकिन लगातार प्रदूषण का शिकार हो रही रामगंगा का पानी अब उपयोग लायक नहीं रह गया है।
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लोगों ने बताया कि स्वच्छ भारत या स्पर्श गंगा अभियान कभी भी इस नदी में नहीं चल पाया। एक-दो बार व्यापार संघ ने अपने संसाधनों से नदी की सफाई की थी, लेकिन बार-बार सफाई के लिए व्यापार संघ के पास कोई मद नहीं है। व्यापार संघ अध्यक्ष बलवंत सत्याल का कहना है कि प्रशासन को महीने में कम से कम एक बार नदी में सफाई अभियान चलाना चाहिए और लोगों को इस बात के लिए जागरूक करना चाहिए कि नदी के तट को गंदा न किया जाए।
सफाई के लिए कुछ स्वयंसेवी संगठनों की भी मदद ली जानी चाहिए। रामगंगा के किनारे थल का प्राचीन शिव मंदिर है। वर्ष में चार बार इस मंदिर में मेले लगते हैं। पवित्र महीनों में लोग नदी में स्नान के बाद मंदिर में पूजा करते हैं। तहसीलदार रघुवीर सिंह का कहना है कि नदी के तट पर सफाई अभियान चलाने के लिए अब कुछ संगठनों की मदद ली जाएगी और जिला प्रशासन को प्रस्ताव भेजा जाएगा।