गंदगी से पटा पिथौरागढ़ का चंद्रभागा नाला
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सोर घाटी की रोजाना 60 लाख लीटर सीवरेज गंदगी सीधे महाकाली नदी में समा रही है। यह गंदगी नदी के साथ ही स्थानीय पर्यावरण को भी प्रदूषित कर रही है। अनिस्तारित सीवरेज से नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को सीधा नुकसान तो पहुंच ही रहा है, भूमिगत जल के साथ ही वायु, मृदा प्रदूषण भी हो रहा है। प्रतिकूल पर्यावरणीय हालातों के बीच सरकारी मशीनरी उदासीन बनी है।
सोर घाटी में लगभग एक लाख की आबादी है, इस आबादी से निकलने वाली गंदगी शहर में बिछाई गई सीवर लाइनों से होते हुए ऐंचोली में चंद्रभागा गधेरे में जा रही है और भड़कटिया में ठुलीगाड़ में मिल जाती है। ठुलीगाड़ गधेरे से बहते हुए यह गंदगी अड़किनी होते हुए नेपाल और भारत की विभाजक महाकाली नदी में मिल जाती है। महाकाली में जा रहा यह सीवरेज अनिस्तारित है। सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट के अभाव में बिना शोधन जा रही गंदगी नदी के पारिस्थितिकी तंत्र को प्रभावित कर रही है। इससे चंद्रभागा और ठुलीगाड़ के खुले जलस्रोतों के साथ ही भूमिगत जल और मृदा भी प्रदूषित हो रही है।
गंदे नाले में तब्दील हो चुका चंद्रभागा गधेरा
एक दशक पहले तक साफ पानी का स्रोत रहा चंद्रभागा गधेरा अब गंदे नाले में तब्दील हो चुका है। एक समय था, जब चंद्रभागा के पानी को सीधे पीने और अन्य कामों में इस्तेमाल किया जाता था। वर्तमान में सोर घाटी का सारा सीवरेज दो अलग-अलग लाइनों के जरिये सीधे चंद्रभागा में गिर रहा है। ऐंचोली से आगे चंद्रभागा कीचड़ और गंदगी से पटे नाले का रूप ले लेता है।
अवैध सीवर लाइन से जा रही गंदगी
चंद्रभागा गधेरे पर ही पिथौरागढ़ सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाया जा रहा है। जल निगम ने बिना ट्रीटमेंट प्लांट बनाए शहर के बड़े हिस्से में सीवर लाइन बिछा दी है। एक पुरानी लाइन भी है। नई बनी लाइनों में बड़ी आबादी ने अवैध रूप से कनेक्शन जोड़ लिए हैं। पुरानी और नई लाइन से होते हुए सीवरेज निर्माणाधीन प्लांट के पास गधेरे में गिर रहा है। ट्रीटमेंट प्लांट पहले बना होता तो सीवरेज का शोधन होता और महाकाली नदी के साथ ही स्थानीय पर्यावरण को खतरे का सामना नहीं करना पड़ता।
बिना शोधन सीवरेज को नदी या सहायक जल स्रोतों में नहीं मिलाया जा सकता है। इसे लेकर एनजीटी और पर्यावरण कानूनों में स्पष्ट नियम हैं। ऐसा करना आपराधिक कृत्य है। बिना शोधन नदी में जा रही गंदगी से पारिस्थितिकी तंत्र को खतरा है। इससे भूमिगत जल के साथ ही मृदा एवं वायु प्रदूषण का भी खतरा है।
-डॉ. राजेश जोशी, पर्यावरण विशेषज्ञ, जीबी पंत हिमालयी पर्यावरण संस्थान
चंद्रभागा गधेरे पर दो सीवरेज ट्रीटमेंट प्लांट बनाए जा रहे हैं। प्लांट का काम जल्द से जल्द पूरा कराया जाएगा। फिलहाल सीवरेज के वैज्ञानिक निस्तारण का कोई विकल्प नहीं है। हालांकि देखा जाएगा कि सीवरेज प्रणाली निर्माण में कहां अनियमितता हुई। पर्यावरण को नुकसान की क्षतिपूर्ति का भी प्रयास किया जाएगा।
-सी रविशंकर, डीएम, पिथौरागढ़