पिथौरागढ़। बेस अस्पताल में डायलिसिस मशीनों में खराबी से जिले के किडनी मरीजों की दिक्कत बढ़ गई है। डायलिसिस की सुविधा न मिलने से कई किडनी मरीज हायर सेंटर के चक्कर काटने के लिए मजबूर हैं। मशीनों को ठीक नहीं किया जा रहा है और मरीजों को हायर सेंटर रेफर कर जिम्मेदारी निभाई जा रही है।
जिले में सिर्फ बेस अस्पताल में किडनी मरीजों के लिए डायलिसिस सुविधा है। यहां स्थापित सात मशीनों से रोजाना दो शिफ्टों में 14 किडनी मरीजों का डायलिसिस किया जाता है। बीते लंबे समय से तीन मशीनें खराब हैं इन्हें ठीक नहीं किया जा सका है। ऐसे में सभी किडनी मरीजों का डायलिसिस नहीं हो पा रहा है। मजबूरन किडनी मरीजों को हायर सेंटर रेफर किया जा रहा है। ऐसे में मरीज डायलिसिस के लिए दर्द से कराहते हुए हल्द्वानी, बरेली के चक्कर काटने के लिए मजबूर हैं। स्वास्थ्य विभाग ने मशीनें ठीक करने के लिए तकनीशियन तो बुलाए हैं लेकिन वे कब पहुंचेंगे इसका किसी को पता नहीं है।
लिफ्ट भी नहीं हो सकी ठीक
बेस अस्पताल में संचालन के तीन साल बाद भी स्वास्थ्य व्यवस्थाएं बेहतर होने के बजाय दम तोड़ रही हैं। अस्पताल में किडनी सहित अन्य मरीजों को डायलिसिस यूनिट और डॉक्टरों के कक्षों तक आसानी से पहुंचाने के लिए लाखों रुपये से लिफ्ट स्थापित की गई है। हैरानी है कि लंबे समय से लिफ्ट खराब है और किडनी सहित अन्य मरीज सीढ़ियां चढ़कर डायलिसिस यूनिट और चिकित्सकों के कक्षों तक पहुंचने के लिए मजबूर हैं।
डायलिसिस में एक बार में खर्च होते हैं तीन से चार हजार
डायलिसिस में एक बार में निजी अस्पतालों में तीन से चार हजार रुपये खर्च होते हैं। मशीनें खराब होने से कई मरीजों को हल्द्वानी या बरेली के चक्कर काटने पड़ रहे हैं। एक बार डायलिसिस के लिए उनके किराया सहित सात से आठ हजार रुपये खर्च हो रहे हैं।
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बेस अस्पताल में कुछ डायलिसिस मशीनें खराब हैं इन्हें जल्द ठीक किया जाएगा। नई मशीनों की व्यवस्था भी की जाएगी। सभी मरीजों का स्थानीय स्तर पर डायलिसिस करने के लिए अस्पताल प्रबंधन से शिफ्ट बढ़ाने के लिए भी वार्ता की जाएगी। -
डॉ. जेएस चुफाल, सीएमओ, पिथौरागढ़