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धारचूला में एक हजार मकानों पर खतरा

Thu, 13 Aug 2015 10:51 PM IST
कृष्णा गर्ब्याल/अमर उजाला, धारचूला
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धारचूला नगर में महाकाली के किनारे बनाए गए एक हजार मकान खतरे की जद में हैं, यदि कभी महाकाली ने अपना रौद्र रूप दिखाया तो उस समय स्थिति कितनी विकराल होगी इसकी कल्पना नहीं की जा सकती। वर्ष 2013 की आपदा के बाद महाकाली से बचाव के लिए तटबंधों का निर्माण तो शुरू किया गया है, लेकिन दो वर्ष में सिर्फ बाटम लेबल ही पूरा हो पाया है। महाकाली रोज उफनती है। वह तटों को काटती जा रही है।
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धारचूला नगर में गर्ब्याल खेड़ा, तहसील वार्ड, हास्पिटल रोड के सभी मकान महाकाली किनारे बने हैं। खेल विभाग ने भी अपने स्टेडियम को जानबूझकर नदी किनारे ही बना दिया। लोग हर साल बारिश के मौसम में दहशत की जिंदगी जीने को मजबूर हैं। सरकार के मंत्री हमेशा सुरक्षा के पुख्ता इंतजामों की बात तो करते हैं लेकिन उस पर कभी अमल नहीं होता। सौभाग्य से प्रदेश के मुख्यमंत्री इसी क्षेत्र से विधायक हैं लेकिन उनके स्तर से भी धारचूला की सुरक्षा के लिए कोई ठोस पहल नहीं हुई है।

धारचूला नगर का विस्तार 1960 में तहसील मुख्यालय के गठन के बाद तेजी से हुआ। गांवों से आकर लोग यहां बसने लगे। धीरे-धीरे मकान बनाने की जगह सिमटती गई और लोगों ने देखादेखी महाकाली के किनारे ही मकान खड़े कर दिए। यह बात अलग है कि नदी किनारे मकान बनाकर रहने वालों में कम से कम बारिश के मौसम में तो कोई सुकून नहीं रहता।
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जलस्तर कम होते ही तेज होगा काम
राज्य अनुसूचित जाति जनजाति आयोग के उपाध्यक्ष कैलाश रावत का कहना है कि तटबंध बनाने का काम नदी का जलस्तर कम होते ही तेज कर दिया जाएगा। वह खुद भी काम का निरीक्षण करेंगे। वह कहते हैं कि सरकार सुरक्षा के उपाय कर रही है।

सरकार को आम आदमी की चिंता नहीं
भाजपा मंडल अध्यक्ष ओमप्रकाश कापड़ी का कहना है कि सरकार को आम आदमी की चिंता नहीं है। दो साल से तटबंधों का निर्माण पूरा न होना चिंता का विषय है। महाकाली को अवैध खनन का अड्डा बना दिया है, इस पर किसी की नजर नहीं है। वह कहते हैं कि सरकार ने आम जनता के साथ गंभीर धोखा किया है।
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