पिथौरागढ़। धारचूला सीएचसी में स्वास्थ्य सेवाएं दम तोड़ रही हैं। यहां स्त्री रोग विशेषज्ञ और रेडियोलॉजिस्ट का पद लंबे समय से रिक्त है। इससे गर्भवतियां और अन्य मरीज परेशान हैं। गर्भवतियों को अल्ट्रासाउंड के साथ ही प्रसव के लिए भी 95 किमी दूर जिला मुख्यालय की दौड़ लगानी पड़ रही है। वहीं अन्य मरीज भी अल्ट्रासाउंड के लिए भटकने के लिए मजबूर हैं।
सीमांत के लोगों को बेहतर स्वास्थ्य सुविधा उपलब्ध कराने के उद्देश्य से धारचूला में संयुक्त अस्पताल खोला गया है। यहां हर रोज भारत के साथ ही नेपाल से गर्भवतियां और अन्य मरीज जांच और उपचार के लिए पहुंचते हैं। यहां स्त्री रोग विशेषज्ञ के दो पर स्वीकृत हैं जो रिक्त हैं।
रेडियोलॉजिस्ट की भी तैनाती नहीं हो सकी है। ऐसे में यहां गर्भवतियों की जांच और प्रसव के लिए विशेषज्ञ नहीं हैं तो अल्ट्रासाउंड कराने के लिए रेडियोलॉजिस्ट। मजबूर होकर गर्भवतियां जांच और प्रसव के लिए जिला मुख्यालय की दौड़ लगा रही हैं। वहीं इस अस्पताल में बालरोग विशेषज्ञ और सर्जन भी तैनात नहीं हैं। विशेषज्ञ चिकित्सक नहीं होने से मरीजों को रेफर करना अस्पताल प्रबंधन की मजबूरी बन गया है। संवाद
अल्ट्रासाउंड मशीन खा रही है जंग
पिथौरागढ़। सीएचसी धारचूला में गर्भवतियों और मरीजों को राहत पहुंचाने के लिए अल्ट्रासाउंड मशीन तो खरीदी है। रेडियोलोजिस्ट नहीं होने से मशीन का संचालन नहीं हो रहा है और यह जंक खा रही है। गर्भवतियां निशुल्क अल्ट्रासाउंड के लिए दो हजार रुपये में वाहन बुक कर जिला मुख्यालय की दौड़ लगाने के लिए मजबूर हैं। वहीं अन्य मरीजों को दर्द से कराहते हुए टैक्सी और रोडवेज बस में धक्के खाकर जिला अस्पताल पहुंचना पड़ रहा है। संवाद
कोट
सीएचसी धारचूला में विशेषज्ञों के रिक्त पदों की सूचना निदेशालय को दी गई है। इनकी तैनाती शासन स्तर पर ही संभव है। उम्मीद है जिले में जल्द विशेषज्ञों की कमी दूर होगी। - डॉ. जेएस नबियाल, सीएमओ, पिथौरागढ़।
बदल रहा मौसम कर रहा बीमार, अस्पताल में बढ़ी भीड़
चंपावत। मौसम में बदलाव के चलते जिला अस्पताल में वायरल बुखार, खांसी, जुकाम के मरीज बढ़ रहे हैं। अस्पताल में हर रोज 25 से अधिक मरीज इलाज के लिए आ रहे हैं। इससे मरीजों को काफी दिक्कतों का सामना करना पड़ रहा है।
फिजिशियन डॉ. दीपक रावत ने बताया कि वायरल बुखार सहित अन्य बीमारियों के मरीज बढ़ रहे हैं। उन्होंने कहा कि इस मौसम में खुद का ध्यान रखने की जरूरत है। कहा कि ऐसे लोगों को ठंड से बचना चाहिए। साथ ही अभी गर्म कपड़े पहनने चाहिए ताकि मौसम का दुष्प्रभाव न पड़ सकें। इससे लोगों को इस प्रकार की बीमारियां कम होंगी। ऐसे मौसम में ठंडा पानी नहीं पीना चाहिए, खट्टी चीजें कम खानी चाहिए और अधिक दिक्कत होने पर चिकित्सक की सलाह लेनी चाहिए।