दरकोट में स्थानीय पत्थरों से तैयार और वास्तुकला का बेजोड़ नमूना बनकर तैयार हो गया है। मंदिर में शुक्रवार को प्रथम नवरात्र से देवी भागवत कथा शुरू होगी। उसी समय मंदिर का उद्घाटन भी होगा। 17 अप्रैल को भागवत कथा का समापन होगा। यह मंदिर स्थानीय स्तर पर उपलब्ध पत्थरों को तराशकर तैयार किया गया है। यह पत्थर तराशने के बाद संगमरमर जैसा दिखता है।
मंदिर के गुंबद, चहारदीवारी, मुख्य कक्ष, गर्भगृह सभी में स्थानीय पत्थर का ही प्रयोग किया गया है। दरकोट निवासी ग्रामीण अभियंत्रण सेवा के अधिशासी अभियंता जीवन सिंह धर्मशक्तू ने बताया कि यह मंदिर वास्तुकला की दृष्टि से पूरे उत्तराखंड में अनूठा है। इसे स्थानीय लोगों के सहयोग से तैयार किया गया है। उन्होंने बताया कि पत्थरों को तराशने के लिए राजस्थान से संगमरमर की कटिंग करने वाले कारीगर बुलाए गए थे।
कारीगरों ने जिस मेहनत से काम किया उसी के परिणामस्वरूप यह भव्य मंदिर बन पाया है। उन्होंने कहा कि पत्थरों में किसी प्रकार का रंगरोगन नहीं किया जाएगा। सामाजिक कार्यकर्ता श्रीराम धर्मशक्तू ने कहा कि यह दरकोट गांव में अद्भुत धरोहर तैयार हो चुकी है।