पिथौरागढ़। युवाओं को तकनीकी शिक्षा का ज्ञान देने के लिए करोड़ों की लागत से बने राजकीय प्रौद्योगिकी संस्थान (आईटीआई) गुरना के भवन में कभी कक्षाएं संचालित नहीं हो पाईं। एक दशक पूर्व निर्मित यह भवन अब सफेद हाथी बनकर रह गया है और क्षेत्र के युवा तकनीकी शिक्षा का ज्ञान लेने के लिए भटक रहे हैं।
जिला मुख्यालय से करीब 10 किलोमीटर दूर गुरना में नेशनल हाईवे के किनारे लगभग चार करोड़ की लागत से आईटीआई भवन बनकर तैयार किया गया। लाखों की मशीनरी और फर्नीचर की व्यवस्था भी हुई। इसके बाद भी भवन में कक्षाएं शुरू नहीं हुईं। अनुदेशक की तैनाती कर करीब दो वर्ष तक युवाओं को नजदीक में किराये के भवन में पढ़ाया गया। इसके बाद आईटीआई बंद करने का आदेश जारी कर वहां पढ़ रहे कुछ बच्चों को अन्य आईटीआई से संबद्ध कर जिम्मेदारी निभा दी गई। कोरोना काल में आईटीआई भवन क्वारंटीन सेंटर बनाया गया। वहां स्थापित मशीनरी और फर्नीचर दूसरे संस्थानों में भेज दिया गया। सालों से बंद आईटीआई भवन अब क्षेत्र के लोगों को मुंह चिढ़ा रहा है। क्षेत्र के लोग जनता के धन की बर्बादी पर रोष जताते हुए भवन में शीघ्र आईटीआई संचालित करने की मांग कर रहे हैं।
बोले लोग
आईटीआई शुरू करवाने को मुख्यमंत्री तक आवाज पहुंचाई गई, पर सरकार और विभाग इस पर कार्रवाई नहीं कर रहे हैं ।
बसंत भट्ट, केंद्रीय महामंत्री, उत्तराखंड राज्य निर्माण सेनानी संगठन
जनता के धन की खुली बर्बादी हो रही है, जबकि युवा शिक्षा पाने के लिए इधर-उधर भटक रहे हैं। गुरना में आईटीआई शुरू नहीं हुई तो क्षेत्रवासी आंदोलन के लिए विवश होंगे।
उषा तिवारी, ग्राम प्रधान, गुरना
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जिलाधिकारी से भी इस संबंध में क्षेत्रवासी मिले। उन्होंने आईटीआई शुरू करवाने में सहयोग का भरोसा दिलाया। फिलहाल कार्रवाई नहीं हुई है।
कैलाश भट्ट, सरपंच, गुरना
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आईटीआई के लिए बनी बिल्डिंग खस्ताहाल हो रही है। अराजक तत्व वहां तोड़फोड़ करते हैं। जनता के धन का इस तरह दुरुपयोग चिंता की बात है।
प्रियंका पांडे, पूर्व प्रधान
कोट-निदेशालय स्तर पर इस मामले को रखा गया था। फिलहाल इस संबंध में अभी कोई दिशा-निर्देश नहीं हैं। जिले में अनुदेशक की नियुक्ति भी कम है। हालांकि गुरना स्थित भवन में कुछ शॉर्ट-टर्म कोर्स चलाए जा सकते हैं।
दर्शन सती, प्रधानाचार्य, आईटीआई, पिथौरागढ़