फ्री ई-पेपर
पर्सनलाइज़्ड फ़ीड
पर्सनलाइज़्ड नोटिफ़िकेशन
चलते-फिरते ख़बरें
लॉयल्टी रिवॉर्ड्स
विज्ञापन

डिजायन वाले मिट्टी के दीये पहुंचे पर खरीदार नहीं

Sun, 15 Oct 2017 10:17 PM IST
ब्यूरो/अमर उजाला, पिथौरागढ़
विज्ञापन
पिथौरागढ़ में डिजायन वाले दीये लेकर पहुंचा व्यवसायी - फोटो : अमर उजाला
विज्ञापन
दिवाली पर मिट्टी के दीये जलाने का खूब प्रचार किया जाता है, लेकिन मिट्टी के दीयों का बाजार अब तक गति नहीं पकड़ पाया है। इस बार पिथौरागढ़ बाजार में डिजायन वाले मिट्टी के दीये भी पहुंचे हैं, लेकिन खरीदार नहीं होने से इनकी बिक्री बहुत कम है। डिजायन वाले यह दीये कोलकाता में बनते हैं। वहां से उनको बरेली तक लाया जाता है। बरेली से यह दीये कुमाऊं के कई शहरों तक पहुंचते हैं।
विज्ञापन


खास डिजायन वाले इन दीयों को लेकर यहां पहुंचे मोहम्मद इरशाद ने बताया कि इन दीयों में लक्ष्मी का चित्र भी बना है। आकार में भी यह थोड़ा बड़े हैं। दिवाली पर इन दीयों को जलाने से घर की शोभा बढ़ेगी। वह कहते हैं कि अभी मिट्टी के दीयों की बिक्री बहुत कम है। उन्होंने उम्मीद जताई कि सोमवार से बिक्री तेज हो सकती है। मिट्टी के दीये बेचने वाले मोबीन, अंशुल, प्रियांशु, प्रदीप ने बताया कि इन दीयों को बेचने में कोई खास फायदा नहीं होता। दस रुपये में एक दर्जन दीये देने पड़ते हैं। कभी-कभी तो दिनभर की मजदूरी भी नहीं निकल पाती। वह कहते हैं कि पहले लोग मिट्टी के दीये ज्यादा खरीदते थे, लेकिन पिछले कुछ वर्षों से इनकी बिक्री घटी है। गांवों में भी लोग दिवाली पर रोशनी के लिए मोमबत्ती का ही प्रयोग करते हैं।

इधर, कई संगठन मिट्टी के दीयों का प्रयोग करने, स्वदेशी अपनाने का प्रचार तो कर रहे हैं, लेकिन आम लोगों पर इसका कोई खास असर नहीं पड़ रहा है। लोगों का कहना है कि मिट्टी के दीयों से घर को रोशन करने का विचार तो अच्छा है, लेकिन इसमें मेहनत ज्यादा पड़ती है। पहले दीयों में तेल भरना पड़ता है, फिर रुई की बत्तियां बनाकर उसमें रखनी पड़ती है। इसकी तुलना में मोमबत्ती से रोशनी करने में आसानी होती है।
विज्ञापन
विज्ञापन
विज्ञापन
Next
AU ऐप में पढ़ें