पंचेश्वर बांध के विरोध में प्रदर्शन करते कानड़ी गांव के लोग।
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महाकाली लोक संगठन ने पंचेश्वर बांध के विरोध में महाकाली के किनारे बसे कानड़ी गांव में प्रदर्शन किया। साथ ही महाकाली नदी पर बनने वाले दोनों बांधों (पंचेश्वर और रुपालीगाढ़) की जनसुनवाई अलग-अलग करने की मांग की। प्रभावित क्षेत्र के लोगों बिना बताए अनापत्ति प्रमाण पत्र लेने को गलत ठहराते हुए निरस्त करने की मांग की।
महाकाली नदी पर बनने वाले पंचेश्वर बांध का विरोध एक बार फिर से शुरू होने लगा है। इसी के तहत मूनाकोट ब्लाक के नदी किनारे स्थित कानड़ी गांव के लोगों ने सरकार को आगाह करते हुए परिणाम भुगतने की धमकी तक दे डाली है। ग्राम प्रधान लक्ष्मण चंद के नेतृत्व में किए गए प्रदर्शन के दौरान लोगों ने कहा कि गांवों का विकास चाहिए, बांध बनाकर विनाश का रास्ता न दिखाया जाए। लोगों ने बांध के विरोध में नारे लगाए। प्रधान ने कहा कि सरकार झूठी सुनवाइयां रद्द करे और 50 हजार परिवारों, 12 हजार हेक्टेयर भूमि, 90 मंदिर और 120 गांवों को डुबाने की न सोचे अन्यथा इसके परिणाम गंभीर होंगे।
उन्होंने यह भी कहा कि झूठ के सहारे की गई चंपावत, अल्मोड़ा और पिथौरागढ़ की जनसुनवाइयां रद्द की जाएं। मांग की गई कि पहले प्रभावित क्षेत्र में वन अधिकार अधिनियम 2006 लागू किया जाए। प्रदर्शन करने वालों में गणेश चंद, राजेंद्र चंद, लोकेंद्र चंद, जगत चंद, कल्याण चंद, कुंती देवी और भगवान सिंह आदि लोग शामिल थे।