थल के बलतिर गांव में सिंचाई के अभाव में सूखे पड़े खेत
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यहां बलतिर गांव में 55 हेक्टेयर जमीन में बोए गए गेहूं और मसूर के बीज अंकुरित नहीं हो पाए हैं। दो महीने पहले लोगों ने खेतों में बुआई कर दी थी। गांव के लिए भेलियागाड़ से बनी सिंचाई नगर के टूट जाने के कारण खेतों में पानी नहीं पहुंच पा रहा है। पहली बार लोगों को इतना बड़ा संकट झेलना पड़ा है।
गांव के लोगों ने बताया कि यह नहर 1955 में बन गई थी। पिछले साल आपदा के समय नहर को काफी नुकसान पहुंचा था। गांव के लोगों ने खुद नहर की मरम्मत कर पानी चलाने का प्रयास भी किया, लेकिन कामयाबी नहीं मिली। धान की बुआई तो किसानों ने बारिश के पानी की मदद से कर ली थी, लेकिन गेहूं की बुआई के लिए बारिश न होने के कारण जमीन में नमी की मात्रा समाप्त हो गई है।
ग्राम प्रधान महिराज भैंसोड़ा ने बताया कि इस बार गेहूं और मसूर का उत्पादन चौपट होने की आशंका है। अब तक बीज ही अंकुरित नहीं हुए हैं। यदि अब बारिश हो भी जाती है तो इसका कोई फायदा मिलने वाला नहीं है। सामाजिक कार्यकर्ता पूरन सिंह भैंसोड़ा ने कहा कि एक साल से टूटी नहर की मरम्मत न होना गंभीर लापरवाही है। उन्होंने कहा कि सरकार फसलों का उत्पादन बढ़ाने की बात क्यों करती है, जब सिंचाई की सुविधा ही नहीं होगी तो उत्पादन कैसे बढ़ेगा। लघु सिंचाई विभाग के अवर अभियंता केडी कांडपाल ने बताया कि बलतिर नहर की मरम्मत के लिए प्रधानमंत्री सिंचाई योजना की मद से धन की मांग की गई है, लेकिन एक साल से यह प्रस्ताव अटका हुआ है। उन्होंने कहा कि धन मिलने के बाद ही मरम्मत का काम शुरू हो पाएगा।