पिथौरागढ़। दिवाली पर घरों को सजाने के लिए प्लास्टिक की रेडीमेड फूल-मालाओं से बाजार गुलजार है। दूर से सच के फूल-पत्तियों का एहसास कराने वाली इन मालाओं की मांग काफी है। बाहर से सजाए गए मिट्टी के चमचमाते दिए भी बाजार में उपलब्ध हैं तो छोटे और बड़े रेडीमेड ऐपण से भी बाजार सजा है लेकिन रेडीमेड ऐपण की मांग अब कम होती जा रही है।
जिला मुख्यालय में सिल्थाम से लेकर गांधी चौक, सिमलगैर और पुरानी बाजार में हर तरफ फड़-ठेलियों और पक्की दुकानों में हर तरफ टंगी रेडीमेड मालाएं ग्राहकों को रंग-बिरंगा एहसास करा रही हैं। शुक्रवार को धनतेरस के दिन और उससे कुछ रोज पहले से लोगों ने इन मालाओं को खरीदने में खासी रुचि दिखाई। गांधी चौक में स्टॉल लगाए दुकानदार मुकेश कुमार और नीरज ने बताया कि घर और मंदिरों के सजाने में इस्तेमाल होने वाली प्लास्टिक की मालाओं की मांग काफी है।
दोनों ने बताया कि अब रेडीमेड ऐपण की मांग पहले की अपेक्षा कम हो गई है। उन्होंने कहा कि अब अधिकतर घरों में टाइल्स लगने के कारण लोग इन्हें कम खरीदते हैं, क्योंकि चिपकाने के कुछ समय बाद रेडीमेड ऐपण के दाग टाइल्स में रह जाते हैं। हां कुछ लोग छोटे आकार के ऐपण जरूर ले जाते हैं।
पुरानी बाजार क्षेत्र में रास्ते के किनारे दीया विक्रेता वसीम ने बताया कि दीयों की भी अच्छी मांग है। बाहर से सजाया गया मिट्टी का बड़ा दिया 15 रुपये का एक है तो छोटे आकार के दीये 80 रुपये के एक दर्जन हैं। वहीं इलेक्ट्रॉनिक लड़ी विक्रेता महेश का कहना था कि पिक्सल लाइट वाली लड़ी के साथ ही चाइनीज लड़ियां खरीदने में लोगों की दिलचस्पी है।